नई दिल्ली, 10 अप्रैल (अशोक “अश्क) अमेरिका के साथ हालिया सीजफायर के बाद ईरान ने दुनिया की सबसे अहम समुद्री राह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बड़ा दांव चल दिया है। खबर है कि अब यहां से गुजरने वाले जहाजों से भारी-भरकम टोल वसूला जा सकता है, जिसकी रकम 20 लाख डॉलर तक हो सकती है। मंगलवार को ईरान की संसद में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने की बात सामने आई है। हालांकि भारत सरकार ने इस पर सतर्क रुख अपनाया है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर भारत और ईरान के बीच कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई है। करीब छह सप्ताह तक युद्ध के कारण बंद रहा होर्मुज जलडमरूमध्य अब धीरे-धीरे खुलने की ओर है। एक ईरानी अधिकारी के अनुसार, सीमित स्तर पर शुक्रवार से आवाजाही शुरू हो सकती है, लेकिन नियंत्रण पूरी तरह तेहरान के हाथ में रहेगा। रणनीतिक रूप से अहम इस मार्ग से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल परिवहन होता है। ऐसे में टोल वसूली का फैसला वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार पर बड़ा असर डाल सकता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ओमान के साथ मिलकर ईरान जहाजरानी शुल्क लागू कर सकता है, जिससे उसे नया राजस्व स्रोत मिलेगा। दिलचस्प बात यह है कि युद्ध के दौरान ईरान ने भारत सहित कुछ देशों को “मित्र” मानते हुए जहाजों को गुजरने की अनुमति दी थी। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या भविष्य में भारत को भी इस टोल का सामना करना पड़ेगा या कोई विशेष छूट मिलेगी। फिलहाल, इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।


















