नई दिल्ली, 10 अप्रैल (अशोक “अश्क”) बहुचर्चित ‘कैश कांड’ में फंसे इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा ने आखिरकार अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति को भेजे अपने त्यागपत्र में उन्होंने कहा कि वह “भारी मन” से यह निर्णय ले रहे हैं, हालांकि इस्तीफे के कारणों का खुलासा करने से उन्होंने साफ इनकार कर दिया। यह मामला 14 मार्च 2025 को उस वक्त सामने आया था, जब दिल्ली स्थित उनके आवास पर भीषण आग लग गई थी।

उस समय वर्मा दिल्ली हाई कोर्ट में जज थे। आग बुझने के बाद पुलिस और दमकल विभाग की टीम को मौके पर बड़ी मात्रा में जला हुआ नकद मिला, जिसने पूरे न्यायिक तंत्र को झकझोर दिया। विवाद बढ़ने के बाद जस्टिस वर्मा का तबादला इलाहाबाद हाई कोर्ट कर दिया गया था। साथ ही उन्हें न्यायिक कार्यों से अलग कर दिया गया था, यानी वह पद पर रहते हुए भी किसी मामले की सुनवाई नहीं कर रहे थे। इस बीच, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 12 अगस्त 2025 को जजेस इंक्वायरी एक्ट, 1968 के तहत एक जांच समिति गठित की थी।

सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस अरविंद कुमार की अध्यक्षता वाली इस समिति में जस्टिस मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव और वरिष्ठ अधिवक्ता बी.वी. आचार्य शामिल थे। समिति अपनी रिपोर्ट अंतिम चरण में तैयार कर चुकी थी। अब यदि राष्ट्रपति इस्तीफा स्वीकार कर लेती हैं, तो संसद में चल रही महाभियोग प्रक्रिया स्वतः समाप्त हो जाएगी और मतदान की जरूरत नहीं पड़ेगी। वहीं, इस्तीफा देने के कारण वर्मा को सेवानिवृत्त जज के सभी लाभ भी मिलते रहेंगे।
















