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ओडिशा में आरक्षण का खेल: मेडिकल-इंजीनियरिंग सीटों में बड़ा उलटफेर, सियासत भी गरमाई

भुवनेश्वर: 05 अप्रैल (सेंट्रल डेस्क) मोहन चरण माझी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी सरकार ने ओडिशा में शिक्षा व्यवस्था को झकझोर देने वाला ऐतिहासिक फैसला लिया है। शनिवार देर रात हुई कैबिनेट बैठक में राज्य के मेडिकल, इंजीनियरिंग और तकनीकी संस्थानों में आरक्षण की दशकों पुरानी व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया गया।

इस फैसले के तहत अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़ा वर्ग (SEBC) के लिए आरक्षण लगभग दोगुना कर दिया गया है। सरकार के मुताबिक यह कदम सामाजिक न्याय और समान अवसर सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि पहली बार SEBC वर्ग को तकनीकी शिक्षा में आरक्षण का लाभ मिलेगा, जिससे लाखों छात्रों के लिए डॉक्टर और इंजीनियर बनने का रास्ता खुल गया है।नई व्यवस्था के तहत ST वर्ग का आरक्षण 12% से बढ़ाकर 22.50% कर दिया गया है, जबकि SC वर्ग का कोटा 8% से बढ़ाकर 16.25% कर दिया गया है।

वहीं SEBC के लिए पहली बार 11.25% सीटें आरक्षित की गई हैं। हालांकि सरकार ने कुल आरक्षण को 50% की संवैधानिक सीमा के भीतर ही रखा है, ताकि कानूनी अड़चनों से बचा जा सके। मेडिकल शिक्षा में इसका असर साफ दिखाई देगा। राज्य में कुल 2,421 मेडिकल सीटों में ST छात्रों की सीटें 290 से बढ़कर 545 हो जाएंगी, जबकि SC के लिए 193 से बढ़कर 393 सीटें हो जाएंगी। SEBC छात्रों को अब 272 सीटों का सीधा लाभ मिलेगा। इंजीनियरिंग सेक्टर में भी बड़ा बदलाव हुआ है—44,579 सीटों में ST के लिए 10,030, SC के लिए 7,244 और SEBC के लिए 5,015 सीटें आरक्षित होंगी।सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह नई आरक्षण नीति राज्य के सभी विश्वविद्यालयों, संबद्ध कॉलेजों, सरकारी ITI, पॉलिटेक्निक और प्रोफेशनल कोर्सेज पर लागू होगी। इसमें मेडिसिन, डेंटल, नर्सिंग, फार्मेसी, मैनेजमेंट, MCA, आर्किटेक्चर, कृषि, पशु चिकित्सा, आयुर्वेद और होम्योपैथी जैसे कोर्स शामिल हैं। मुख्यमंत्री माझी ने पूर्व सरकारों, खासकर बीजू जनता दल पर निशाना साधते हुए कहा कि अब तक SC और ST समुदायों को उनकी आबादी के अनुपात में अधिकार नहीं मिले। उन्होंने इसे “सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम” बताया।राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह फैसला केवल शिक्षा सुधार नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी है। SEBC को पहली बार आरक्षण देकर भाजपा ने एक बड़े वोट बैंक को साधने की कोशिश की है, वहीं SC-ST कोटे में बढ़ोतरी कर पार्टी ने इन समुदायों में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति अपनाई है।

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