नई दिल्ली, 06 मई (सेंट्रल डेस्क) हरियाणा पुलिस कांस्टेबल भर्ती विवाद में बड़ा मोड़ आया है। Punjab and Haryana High Court ने आरक्षित वर्ग के उन अभ्यर्थियों को अंतरिम राहत दी है, जिन्हें सामान्य वर्ग के कट-ऑफ से अधिक अंक होने के बावजूद अगले चरण से बाहर कर दिया गया था। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को CET-2 परीक्षा में प्रोविजनल आधार पर शामिल होने की अनुमति दे दी है।मामले की सुनवाई जस्टिस जे.एस. पुरी की अदालत में हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता रजत मोर ने दलील दी कि अभ्यर्थियों ने पुरुष कांस्टेबल (जीडी) और जीआरपी पदों के लिए आवेदन किया था और CET-1 परीक्षा सफलतापूर्वक पास कर ली थी।

इस चरण में सामान्य वर्ग के लिए 50% और आरक्षित वर्ग के लिए 40% अंक तय थे, जिसे सभी याचिकाकर्ताओं ने पूरा किया। लेकिन विवाद तब खड़ा हुआ जब उन्हें शारीरिक माप परीक्षण (PMT) के लिए नहीं बुलाया गया। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि बाद में अलग से श्रेणीवार कट-ऑफ लागू कर दी गई, जिसके चलते उन्हें बाहर कर दिया गया, जबकि उनके अंक सामान्य वर्ग के कट-ऑफ 52.1796687 से भी अधिक थे। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि यदि किसी आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार के अंक सामान्य श्रेणी से अधिक हैं, तो उसे सामान्य वर्ग में माना जाना चाहिए। इस संदर्भ में उन्होंने Rajasthan High Court vs Rajat Yadav फैसले का हवाला दिया, जिसमें चयन प्रक्रिया में पहले ओपन कैटेगरी के आधार पर विचार करने की बात कही गई है।

वहीं राज्य सरकार और Haryana Staff Selection Commission की ओर से अधिवक्ता संजीव कौशिक ने इसका विरोध करते हुए कहा कि भर्ती नियमों के अनुसार प्रत्येक श्रेणी के लिए अलग मानक तय हैं और चयन प्रक्रिया भी उसी आधार पर होनी चाहिए।दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने सरकार और आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही यह निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं को फिलहाल CET-2 परीक्षा में शामिल होने दिया जाए। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि यह केवल अंतरिम राहत है, अंतिम निर्णय मामले के पूर्ण निपटारे के बाद ही होगा।मामले की अगली सुनवाई 2 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है। इस फैसले ने हजारों अभ्यर्थियों की उम्मीदों को फिर से जगा दिया है।

















