नई दिल्ली, 10 अप्रैल (अशोक “अश्क”) दुनियाँ की तर्ज पर अब भारतीय रेलवे अपने ट्रेनों के डिब्बों में बड़ा बदलाव करने जा रहा है। अमेरिका, जापान, चीन और फ्रांस की तरह अब भारत में भी स्टील और लोहे की जगह एल्युमीनियम कोच तैयार करने की योजना पर तेजी से काम हो रहा है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, एक्सट्रूजन तकनीक से बने एल्युमीनियम अलॉय कोच हल्के, मजबूत और कम मेंटिनेंस वाले होंगे।

खास बात यह है कि इनकी उम्र पारंपरिक डिब्बों से ज्यादा होगी और हल्के होने के कारण ट्रेनों की रफ्तार भी बढ़ेगी। ये कोच खासतौर पर वंदे भारत ट्रेन जैसी सेमी हाई स्पीड ट्रेनों के लिए बेहद उपयोगी माने जा रहे हैं। भारत में शिनकानसेन तकनीक पर आधारित मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में भी एल्युमीनियम कोच का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे संकेत मिल रहा है कि देश तेजी से हाई-स्पीड रेल नेटवर्क की ओर बढ़ रहा है।

इन आधुनिक कोचों के निर्माण के लिए रायबरेली स्थित मॉडर्न कोच फैक्ट्री समेत अन्य इकाइयों में तैयारी चल रही है। विदेशी तकनीक के सहयोग से भारत में ही इनका उत्पादन करने की योजना है। रेलवे अब सिर्फ कोच ही नहीं, बल्कि ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने पर भी जोर दे रहा है। चेन्नई की फैक्ट्री को 220 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली दो नई ट्रेनों के निर्माण का जिम्मा दिया गया है। फिलहाल वंदे भारत ट्रेन 180 किमी प्रति घंटे की अधिकतम गति तक चलती है, लेकिन अब इसे और आगे ले जाने की तैयारी है। नई तकनीक और तेज रफ्तार के इस संगम से भारतीय रेलवे में एक नए युग की शुरुआत होने वाली है, जो यात्रियों को और तेज, सुरक्षित और आरामदायक सफर का अनुभव देगा।
















