नई दिल्ली, 12 अप्रैल (अशोक “अश्क”) अमेरिका और ईरान के बीच बहुप्रतीक्षित शांति वार्ता बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई है, जिससे मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। ईरान ने बातचीत विफल होने के लिए अमेरिका पर “अतार्किक और बेतुकी मांगें” थोपने का आरोप लगाया है, जबकि अमेरिकी पक्ष ने ईरान को समझौता न करने का जिम्मेदार ठहराया है। ईरान के सरकारी प्रसारक IRIB के मुताबिक, ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने 21 घंटे तक लगातार बातचीत कर अपने राष्ट्रीय हितों की मजबूती से पैरवी की।

बयान में कहा गया कि कई सकारात्मक पहल के बावजूद अमेरिकी पक्ष की “अव्यावहारिक शर्तों” ने बातचीत को आगे बढ़ने से रोक दिया, जिसके चलते वार्ता समाप्त करनी पड़ी। दूसरी ओर, अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने साफ शब्दों में कहा कि ईरान ने परमाणु हथियारों से जुड़ी अहम शर्तों को मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, “हम अपना अंतिम और सर्वश्रेष्ठ प्रस्ताव लेकर आए थे, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी।” वेंस ने यह भी जोड़ा कि इस असफलता का ज्यादा नुकसान ईरान को होगा। वार्ता के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से लगातार संपर्क बनाए रखा गया।

यह बैठक पिछले एक दशक में दोनों देशों के बीच पहली सीधी वार्ता थी और ईरानी रिवोल्यूशन के बाद सबसे उच्चस्तरीय संपर्क माना जा रहा था। इस्लामाबाद में हुई इस अहम बैठक में अमेरिकी टीम का नेतृत्व जेडी वेंस के साथ विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ने किया, जबकि ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर कालिबफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची शामिल हुए। विशेषज्ञों का मानना है कि इस वार्ता की विफलता से क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ सकती है और परमाणु मुद्दे पर टकराव और गहरा सकता है। फिलहाल, दोनों देशों के रुख से साफ है कि कूटनीतिक समाधान की राह आसान नहीं रहने वाली।

















