पटना, 12 जून (पटना डेस्क) बिहार की राजनीति में इन दिनों नेताओं की नहीं, बल्कि उनके वारिसों की शैक्षणिक योग्यता चर्चा का विषय बनी हुई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार को लेकर विपक्ष लगातार हमलावर है। राजनीतिक गलियारों में यह नारा भी गूंज रहा है कि “जिसे इंजीनियर बताया जाता था, वह 12वीं पास निकला।”दरअसल, बिहार के तीन बड़े नेताओं लालू प्रसाद यादव, नीतीश कुमार और राम विलास पासवान की शिक्षा और उनके पुत्रों की शैक्षणिक पृष्ठभूमि को लेकर बहस तेज हो गई है। लालू प्रसाद यादव ने स्नातक, राजनीति विज्ञान में परास्नातक और कानून की पढ़ाई की, जबकि उनके पुत्र तेजस्वी यादव की पढ़ाई नौवीं कक्षा के बाद आगे नहीं बढ़ सकी।

क्रिकेट में करियर बनाने की कोशिश के बावजूद वे अपनी पहचान स्थापित नहीं कर सके और बाद में राजनीति में सक्रिय हो गए।वहीं इंजीनियरिंग की डिग्रीधारी नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार ने 12वीं पास करने के बाद इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू तो की, लेकिन अंतिम वर्ष से पहले ही पढ़ाई अधूरी छोड़ दी। इसी तरह दिवंगत नेता रामविलास पासवान ने उच्च शिक्षा हासिल कर राष्ट्रीय राजनीति में पहचान बनाई, जबकि उनके पुत्र चिराग पासवान ने बीटेक की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार के कई बड़े नेताओं ने अपनी मेहनत और शिक्षा के दम पर राजनीति में ऊंचा मुकाम हासिल किया, लेकिन उनके उत्तराधिकारी शैक्षणिक उपलब्धियों के मामले में उनसे काफी पीछे रह गए। हालांकि, समर्थकों का तर्क है कि राजनीति में सफलता का पैमाना केवल डिग्री नहीं, बल्कि जनसमर्थन और नेतृत्व क्षमता भी होती है। फिलहाल शिक्षा बनाम राजनीतिक विरासत की यह बहस बिहार की राजनीति में नए सिरे से गर्मा गई है।
















