नई दिल्ली, 27 अप्रैल (अशोक “अश्क”) देश की राजनीति में सोमवार को बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जब आम आदमी पार्टी (आप) के 7 बागी राज्यसभा सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में विलय को राज्यसभा सचिवालय ने आधिकारिक मंजूरी दे दी। इस फैसले के साथ ही उच्च सदन का सियासी समीकरण पूरी तरह बदल गया है और बीजेपी की ताकत बढ़कर 113 सीटों तक पहुंच गई है। इस घटनाक्रम ने ‘आप’ के भीतर गहरे संकट के संकेत दे दिए हैं। शुक्रवार को राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस विलय की घोषणा की थी।

राघव चड्ढा ने दावा किया था कि यह विलय संविधान के प्रावधानों के तहत हुआ है और पार्टी के दो-तिहाई से अधिक सांसद इसमें शामिल हैं। चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी जानकारी साझा करते हुए बताया कि सात सांसदों ने विलय के दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर राज्यसभा अध्यक्ष को सौंप दिए थे। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने स्वयं और दो अन्य सांसदों के साथ व्यक्तिगत रूप से दस्तावेज जमा किए। सूत्रों के मुताबिक, इस विलय में स्वाति मालीवाल और पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह का नाम भी सामने आ रहा है।

इसके अलावा बलबीर सिंह सीचेवाल और विक्रमजीत सिंह साहनी के भी बीजेपी में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं। ये सभी पंजाब से जुड़े नेता हैं, जिससे राज्य की राजनीति में भी हलचल बढ़ गई है।बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के अनुसार, राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक ने औपचारिक रूप से भाजपा की सदस्यता ले ली है, जबकि अन्य नेता जल्द शामिल हो सकते हैं। इस घटनाक्रम के बाद आम आदमी पार्टी की राज्यसभा में संख्या घटकर महज 3 रह गई है, जो पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम का सीधा असर आगामी 2027 विधानसभा चुनावों पर पड़ सकता है, खासकर पंजाब में ‘आप’ की स्थिति कमजोर हो सकती है। वहीं कांग्रेस की स्थिति फिलहाल 29 सांसदों के साथ स्थिर बनी हुई है। इस बड़े राजनीतिक फेरबदल ने साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर सियासी टकराव और तेज होने वाला है।













