पटना, 15 अक्टूबर (पटना डेस्क) पूर्णियाँ जिले के जलालगढ़ थाना से महज 200 मीटर की दूरी पर करोड़ों रुपये मूल्य की बताई जा रही सरकारी जमीन पर कथित कब्जे का मामला सामने आने से प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है। आरोप है कि भू-माफियाओं ने प्रशासन की मिलीभगत से खाता संख्या 122 की जमीन की अवैध घेराबंदी कर उसे निजी संपत्ति की तरह इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। स्थानीय लोगों का दावा है कि जमीन पर खरीद-बिक्री का खेल भी चल रहा है। बताया जाता है कि उक्त भूमि पहले से ही सरकारी उपयोग के लिए चिन्हित थी। इसके बावजूद वहां पक्की सड़क का निर्माण कर दिया गया और चारों ओर दीवार खड़ी कर दी गई।

इतनी महत्वपूर्ण सरकारी जमीन पर निर्माण कार्य कैसे हुआ और संबंधित अधिकारियों को इसकी भनक तक क्यों नहीं लगी, इसे लेकर स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरकारी जमीन पर कब्जे की पूरी कवायद सुनियोजित तरीके से की गई। मामला सामने आने के बाद जांच की बात कही जा रही है, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी है। राजस्व विभाग और जलालगढ़ थाना की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। सरकारी भूमि पर पक्की सड़क बनाए जाने को लेकर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों ने पूछा है कि सड़क निर्माण किसके आदेश पर हुआ और इसके लिए संबंधित विभाग से अनुमति ली गई थी या नहीं।

यदि जमीन सार्वजनिक उपयोग के लिए निर्धारित थी, तो उस पर निजी गतिविधियों की अनुमति किसने दी, इसकी जांच कराने की मांग जिला पदाधिकारी से की गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो भू-माफियाओं के हौसले और बढ़ सकते हैं। उन्होंने जमीन की पैमाइश, कब्जा हटाने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। अंचल पदाधिकारी सौरभ कुमार ने बताया कि जमीन के मामले की छानबीन की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे की पुष्टि होती है तो भू-माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और संबंधित म्यूटेशन भी रद्द किया जाएगा।















