बक्सर, 07 अक्टूबर (विक्रांत) शहीद पार्क स्थित सभागार में अखिल भारतीय रौनियार वैश्य महासभा, डुमरांव के तत्वावधान में भारत वर्ष के अंतिम हिन्दू सम्राट हेमचंद्र विक्रमादित्य उर्फ हेमू साह का विजयोत्सव श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के संयोजक मोहन गुप्ता ने की, जबकि मंच संचालन सचिव केके गुप्ता ने किया। कोषाध्यक्ष विनय कुमार ने अतिथियों का स्वागत किया तथा उपाध्यक्ष अजय गुप्ता ने धन्यवाद ज्ञापित किया।कार्यक्रम में वक्ताओं ने हेमू साह के जीवन, संघर्ष और वीरता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे अदम्य साहस और पराक्रम के प्रतीक थे। उन्होंने विदेशी आक्रमणकारियों के खिलाफ संघर्ष करते हुए देश की स्वतंत्रता और स्वाभिमान के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

वक्ताओं के अनुसार हेमचंद्र विक्रमादित्य का जन्म वर्ष 1501 में राजस्थान के अलवर जिले में हुआ था। उनके पिता नमक के व्यापारी थे और हेमू का बचपन हरियाणा के रेवाड़ी में बीता। युवा अवस्था में ही उन्होंने मुगलों के खिलाफ संघर्ष शुरू कर दिया था। बताया गया कि उन्होंने जीवनकाल में 22 युद्ध लड़े और कई में विजय हासिल की।उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि 7 अक्टूबर 1556 को अकबर की सेना को पराजित कर दिल्ली की गद्दी पर अधिकार करना थी। इसके बाद उन्हें ‘विक्रमादित्य’ की उपाधि दी गई। हालांकि 5 नवंबर 1556 को पानीपत की दूसरी लड़ाई में वीरतापूर्वक लड़ते हुए उनकी आंख में तीर लगने से वे बेहोश हो गए और बाद में उनका सिर काट दिया गया।

वक्ताओं ने कहा कि हेमू का बलिदान भारतीय इतिहास का गौरवशाली अध्याय है। युवाओं को उनके साहस, देशभक्ति और आत्मसम्मान से प्रेरणा लेनी चाहिए। मौके पर अजय गुप्ता, मनोज गुप्ता, राकेश कुमार, सिगाशान प्रसाद, पवन गुप्ता, विनोद गुप्ता, विश्वनाथ जी, उमेश गुप्ता, राजू गुप्ता, मनोज कुमार, रौशन गुप्ता और ओमप्रकाश गुप्ता समेत बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे।














