पटना, 07 अक्टूबर (अविनाश कुमार) बिहार के सरकारी अस्पतालों में फार्मासिस्ट की नौकरी को लेकर बीफार्मा डिग्रीधारी और डिप्लोमा फार्मासिस्ट एक बार फिर आमने-सामने आ गए हैं। बीफार्मा डिग्रीधारियों ने फार्मासिस्ट बहाली में केंद्रीय भर्ती, पदोन्नति एवं सेवा विनियम-2025 लागू कराने की मांग को लेकर मंगलवार को गर्दनीबाग धरनास्थल पर प्रदर्शन किया और अनिश्चितकालीन अनशन शुरू कर दिया। आंदोलनकारियों ने सरकार से नियमों में बदलाव कर बीफार्मा धारकों को नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल करने की मांग की। अनशन का नेतृत्व कर रहे अर्जेश राज ने कहा कि 1999 और 2006 की नियमित तथा 2013 और 2016 की संविदा बहाली में बीफार्मा डिग्रीधारियों को अवसर मिला था। आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग ने 2024 में नियमावली में संशोधन कर अस्पतालों में फार्मासिस्ट नियुक्ति से बीफार्मा को बाहर कर दिया। इससे प्रदेश के करीब 25 हजार बीफार्म फार्मासिस्ट 2473 पदों की बहाली से वंचित हो गए।

आंदोलनकारियों का दावा है कि इसके चलते करीब 1600 पद भी खाली रह गए। दिव्यांशु राज, विमल कुमार, रवि रंजन कुमार, जयकरण कुमार और अभिमन्यु कश्यप ने भी केंद्रीय नियमावली-2025 लागू करने की मांग उठाई। उनका कहना है कि देश में डीफार्म कोर्स वर्ष 2000 में बंद हो चुका है और कई राज्यों तथा रेलवे में भी इसकी स्थिति बदली है। इसके बावजूद बिहार में बीफार्मा धारकों को ही बाहर कर दिया गया है।डिप्लोमा संगठन ने आंदोलन को बताया आदेश की अवमाननादूसरी ओर, डिप्लोमा फार्मासिस्ट आर्गेनाइजेशन छात्र संघ ने आंदोलन का विरोध किया है। प्रदेश अध्यक्ष अरविंद कुमार चौधरी ने कहा कि पटना हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों में बिहार सरकार की नियमावली के तहत डिप्लोमा इन फार्मेसी को निर्धारित योग्यता बनाए रखने को सही ठहराया गया है।

उन्होंने मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, डीजीपी, डीएम और एसएसपी को पत्र भेजकर आंदोलनकारियों पर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।संगठन ने चेतावनी दी कि यदि कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन कर आंदोलन जारी रहा तो डिप्लोमा फार्मासिस्ट भी सड़क पर उतरकर विरोध करेंगे। साथ ही बीफार्मा धारकों के लिए औषधि निरीक्षक, गवर्नमेंट एनालिस्ट और फार्मेसी शिक्षण जैसे क्षेत्रों में अवसर देने की मांग उठाई है।













