बक्सर, 05 अक्टूबर (विक्रांत) उत्तर और दक्षिण बिहार को रेल मार्ग से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण परियोजना ने अब नया मुकाम हासिल कर लिया है। मोकामा में गंगा नदी पर नवनिर्मित रेल पुल का रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस), पूर्वी सर्किल, कोलकाता गुरु प्रकाश ने 3 और 4 अक्टूबर को निरीक्षण किया। माल एवं यात्री परिवहन के लिए निर्मित इस पुल और विद्युतीकरण के साथ दोहरीकरण कार्य का निरीक्षण पूरा होने के बाद सीआरएस से प्राधिकार मिलते ही इस नए रेल मार्ग पर परिचालन संभव हो जाएगा। करीब 2400 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह नया रेल पुल मौजूदा राजेंद्र पुल के समानांतर और पटना छोर की ओर करीब 50 मीटर की दूरी पर बनाया गया है। पुल पर दोहरी रेल लाइन बिछाई गई है। पूरी परियोजना करीब 15.5 किलोमीटर लंबी है, जिसमें गंगा नदी पर 1.9 किलोमीटर लंबा मुख्य पुल शामिल है।

मुख्य पुल में गंगा के ऊपर 17 स्टील स्पैन बनाए गए हैं, जबकि 3.6 किलोमीटर लंबा रेल वायडक्ट भी परियोजना का हिस्सा है। परियोजना के तहत आठ लघु पुल, दो सड़क उपरि पुल और तीन रेल ओवर रेल का भी निर्माण किया गया है। पुल की डिजाइन इस तरह तैयार की गई है कि पुराने पुल के एप्रोच में न्यूनतम बदलाव करना पड़े। नए पुल के दोनों छोर हाथीदह, टाल, रामपुर डुमरा, राजेंद्रपुल और बरौनी स्टेशनों से जुड़े रहेंगे। खास बात यह है कि नए डबल लाइन पुल के साथ पुराने राजेंद्र सेतु से भी रेल परिचालन जारी रहेगा। इससे इस रेलखंड पर कुल तीन लाइनों की सुविधा उपलब्ध होगी। इससे उत्तर-दक्षिण बिहार के साथ पूर्वोत्तर राज्यों की रेल कनेक्टिविटी भी मजबूत होगी।

नई व्यवस्था से यात्री ट्रेनों और मालगाड़ियों के परिचालन में सुधार के साथ रेल ट्रैफिक में करीब 2.5 गुना वृद्धि का अनुमान है। माल ढुलाई का समय और लागत घटने से व्यापार तथा आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही को भी बड़ा लाभ मिलेगा। नया मोकामा गंगा रेल पुल बिहार में बेहतर कनेक्टिविटी, कारोबार और आर्थिक विकास की नई राह खोलने वाला साबित होगा।














