सहरसा, 05 अक्टूबर ( कृष्णा) कभी ग्रामीण महिलाओं के लिए पशुपालन महज घर-परिवार की जरूरत पूरी करने का साधन माना जाता था, लेकिन अब यही काम आर्थिक सशक्तीकरण और आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव बन रहा है। सहरसा की कौशिकी महिला दूध उत्पादक कंपनी लिमिटेड से जुड़ी महिलाओं ने मेहनत और लगन के बल पर दूध उत्पादन तथा खरीद-बिक्री के कारोबार को करोड़ों रुपये तक पहुंचाकर मिसाल कायम की है। वर्ष 2017 में स्थापित इस कंपनी से अगस्त 2026 तक 49,344 से अधिक जीविका दीदियां जुड़ चुकी हैं। इन महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है, बल्कि बड़ी संख्या में परिवारों के लिए नियमित आमदनी का रास्ता भी खुला है।

ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री श्रवण कुमार के अनुसार कौशिकी महिला दूध उत्पादक कंपनी का गठन सितंबर 2017 में किया गया था और अक्टूबर 2018 से इसका व्यावसायिक संचालन शुरू हुआ।शुरुआत में सहरसा, सुपौल और मधेपुरा में डेयरी मूल्य शृंखला विकसित करने की योजना बनाई गई थी। बाद में इसका विस्तार खगड़िया और मुंगेर तक किया गया। कंपनी को बिहार जीविका की ओर से वित्तीय सहायता, जबकि एनडीडीबी डेयरी सर्विसेज की ओर से तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे महिलाओं को दूध उत्पादन से लेकर उसके संग्रह, विपणन और बिक्री तक की पूरी प्रक्रिया से जोड़ने में मदद मिली है।

आंकड़े इस बदलाव की बड़ी तस्वीर पेश करते हैं। वर्ष 2019-20 में कंपनी से जहां 16,656 महिला सदस्य जुड़ी थीं, वहीं अगस्त 2026 तक यह संख्या करीब तीन गुना बढ़कर 49,344 हो गई। इसी अवधि में कंपनी का औसत दैनिक दूध संग्रह भी 11,436 किलोग्राम से बढ़कर 94,180 किलोग्राम पहुंच गया। यानी महिलाओं की भागीदारी बढ़ने के साथ दूध कारोबार का दायरा भी तेजी से विस्तृत हुआ है।कौशिकी कंपनी की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि उचित प्रशिक्षण, बाजार से जुड़ाव और संस्थागत सहयोग मिले तो पशुपालन ग्रामीण महिलाओं के लिए मजबूत और टिकाऊ उद्यम बन सकता है।













