• Home
  • कृषि
  • करनाल की तकनीक से बदलेगी मझौलिया के गन्ने की तस्वीर: 20 किसानों का दल प्रशिक्षण के लिए पहुंचा करनाल, कम लागत में अधिक उत्पादन पर जोर
Image

करनाल की तकनीक से बदलेगी मझौलिया के गन्ने की तस्वीर: 20 किसानों का दल प्रशिक्षण के लिए पहुंचा करनाल, कम लागत में अधिक उत्पादन पर जोर

बेतिया, 22 सितंबर (विनय कुमार गुप्ता) गन्ने की खेती में लगातार बढ़ती लागत और उत्पादन से जुड़ी चुनौतियों के बीच मझौलिया के किसानों ने अब आधुनिक तकनीक की ओर कदम बढ़ाया है। मझौलिया शुगर इंडस्ट्रीज के 20 किसानों का दल हरियाणा के करनाल स्थित गन्ना प्रजनन संस्थान में उन्नत तकनीकों का प्रशिक्षण ले रहा है। बिहार सरकार के गन्ना प्रौद्योगिकी विस्तार कार्यक्रम के तहत किसानों को प्रशिक्षण के लिए करनाल भेजा गया है। दल का नेतृत्व चीनी मिल के डिप्टी कैन मैनेजर शिवेंद्र पांडेय कर रहे हैं।प्रशिक्षण में किसानों को गन्ने के उन्नत प्रभेदों के साथ वैज्ञानिक खेती की बारीकियां बताई जा रही है।

फसल की तैयारी से लेकर बेहतर बढ़वार तक की पूरी प्रक्रिया समझाई जाएगी। उचित दूरी पर रोपण, बीज उपचार, संतुलित उर्वरक का प्रयोग और खेत प्रबंधन की तकनीक किसानों को सिखाई जाएगी। साथ ही बेहतर सिंचाई व्यवस्था, रोग एवं कीट नियंत्रण तथा कम लागत में अधिक उत्पादन हासिल करने के उपायों पर भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।डीजल-खाद और मजदूरी का बढ़ता खर्च बनी चुनौतीमझौलिया क्षेत्र में गन्ना किसानों की प्रमुख नकदी फसल है। हालांकि डीजल, खाद, कीटनाशक, मजदूरी, सिंचाई और खेत की तैयारी का खर्च लगातार चुनौती बना हुआ है। समय पर सिंचाई नहीं होने से गन्ने की बढ़वार और वजन प्रभावित होता है। गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता की समस्या के साथ लाल सड़न और तना छेदक जैसे रोग-कीट भी उत्पादन पर असर डालते हैं।

क्षेत्र में गन्ने की औसत उपज करीब 20 से 35 टन प्रति एकड़ बताई जाती है।किसानों के अनुसार वैज्ञानिक विधियों को अपनाकर उत्पादन बढ़ाने की संभावनाएं हैं। खेत से गन्ना तैयार करने और मिल गेट तक पहुंचाने में प्रति क्विंटल करीब 190 से 220 रुपये तक खर्च आने की बात किसान बताते हैं। हालांकि वास्तविक लागत खेत, मजदूरी, सिंचाई और अन्य खर्च के आधार पर अलग-अलग हो सकती है।प्रशिक्षण के बाद गांवों तक पहुंचेगी नई तकनीकमझौलिया शुगर इंडस्ट्रीज के महाप्रबंधक (गन्ना) अखिलेश कुमार सिंह ने बताया कि किसानों को प्रशिक्षण देने का उद्देश्य उन्हें गन्ने की वैज्ञानिक खेती की नवीन तकनीकों से जोड़ना है। करनाल से मिली जानकारी को किसान अपने खेतों में प्रयोग करेंगे। इससे उत्पादन लागत कम करने और प्रति एकड़ उपज बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।प्रशिक्षण से लौटने वाले किसानों के अनुभव और खेतों में किए गए प्रयोग अन्य किसानों तक भी पहुंचाए जाएंगे। मिल ने तकनीकी जानकारी किसानों तक पहुंचाने के लिए ‘जयश्री किसान परिवार’ एप भी शुरू किया है। करनाल प्रशिक्षण और मोबाइल आधारित तकनीकी जानकारी के जरिए किसानों को आधुनिक खेती से जोड़ने की पहल की जा रही है।

Releated Posts

आयुर्वेद दिवस पर बड़ा अभियान: लखीसराय के किसानों को बांटे गए 15 हजार तुलसी के पौधे, औषधीय खेती का बढ़ेगा दायरा

नालंदा, 23 सितम्बर (सहयोगी संवाददाता विक्रांत) आयुर्वेद दिवस 2026 के अवसर पर औषधीय पौधों को बढ़ावा देने की…

ByByअशोक अश्क सितम्बर 23, 2026

अब हर विद्यार्थी बनेगा किसान की समस्या का समाधानकर्ता: बिहार कृषि विश्वविद्यालय की अनूठी पहल, 19 विश्वविद्यालयों के 397 छात्र जुड़े

बक्सर, 13 सितम्बर (विक्रांत) बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर ने विद्यार्थियों के ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव (RAWE) को अधिक…

ByByअशोक अश्क सितम्बर 13, 2026

बिहार में नारियल की खेती को मिलेगा नया आयाम, विश्व नारियल दिवस पर वैज्ञानिकों ने खोले कमाई और रोजगार के रास्ते

बक्सर, 02 सितम्बर (विक्रांत) बदलते जलवायु और कृषि परिस्थितियों के बीच किसानों की आय बढ़ाने तथा ग्रामीण आजीविका…

ByByअशोक अश्क सितम्बर 2, 2026

किसानों की समस्याओं पर वैज्ञानिकों का मंथन, रबी फसलों से सब्जियों तक की चुनौतियों का निकलेगा वैज्ञानिक समाधान

बक्सर, 25 अगस्त (विक्रांत) बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के बिहार कृषि महाविद्यालय के मुख्य सभागार में मंगलवार को…

ByByअशोक अश्क अगस्त 25, 2026

Leave a Reply

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Scroll to Top