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सेवा की विरासत से चिकित्सा के शिखर तक का सफर, डॉ. आरके सिंह की जिंदगी बनी प्रेरणा की मिसाल

बक्सर, 20 सितम्बर (विक्रांत) सेवा की विरासत, चिकित्सा के प्रति समर्पण और जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशीलता ने डॉ. राकेश कुमार सिंह (डॉ. आरके सिंह) की जीवन-यात्रा को विशिष्ट पहचान दी है। 20 सितंबर 1965 को जन्मे डॉ. सिंह ने करीब तीन दशकों की चिकित्सा सेवा में ग्रामीण, गरीब और वंचित वर्ग तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के साथ सामाजिक सरोकारों को भी अपने कार्य का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया। डॉ. आरके सिंह का जन्म स्वर्गीय डॉ. सिलास सिंह और माता जयवंती देवी के घर हुआ।

उनके पिता डॉ. सिलास सिंह पेशे से प्रख्यात चिकित्सक थे और विश्व प्रसिद्ध मदर टेरेसा द्वारा संचालित अनाथालय एवं उनके घर-आंगन के संचालन में सलाहकार की महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे। उनकी माता जयवंती देवी सीएमसी लुधियाना में जीएएनएम के रूप में सेवाएं दे चुकी थीं। चिकित्सा और सेवा-भाव से जुड़े इसी पारिवारिक वातावरण में डॉ. सिंह का बचपन बीता, जिसने आगे चलकर उनके व्यक्तित्व और कार्यशैली को गहराई से प्रभावित किया। डॉ. सिंह का विवाह स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनीता सिंह से हुआ।

उनकी दो पुत्रियां हैं। बड़ी पुत्री रक्षिता सिंह मुंबई में सिनेमाटोग्राफर के रूप में कार्यरत हैं, जबकि छोटी पुत्री रितिका सिंह चिकित्सक हैं। इस प्रकार परिवार की अगली पीढ़ी भी चिकित्सा और रचनात्मक क्षेत्र से जुड़ी हुई है।चिकित्सा प्रशासन में डॉ. सिंह के सफर की महत्वपूर्ण शुरुआत वर्ष 1998 में हुई, जब उन्हें मेथोडिस्ट अस्पताल, प्रताप सागर का अधीक्षक बनाया गया। इसके बाद उन्होंने चिकित्सा प्रशासन के साथ मरीजों की सेवा पर भी विशेष ध्यान दिया। ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में निःशुल्क चिकित्सा शिविरों के जरिए जरूरतमंदों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में उनकी भूमिका का उल्लेख किया जाता है। टीबी और अन्य वक्ष संबंधी रोगों के उपचार में उनकी सक्रिय भूमिका रही है।

प्रतिवर्ष करीब 200 से 300 मोतियाबिंद मरीजों के लिए निःशुल्क इंट्राऑक्यूलर लेंस प्रत्यारोपण की सुविधा में भी उनके योगदान का उल्लेख किया गया है। इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी और रोटरी इंटरनेशनल से जुड़कर उन्होंने कृत्रिम अंग, व्हीलचेयर, सुधारात्मक शल्यक्रिया, मोतियाबिंद उपचार और बच्चों की हृदय शल्यक्रिया जैसी गतिविधियों में योगदान दिया। चिकित्सा ज्ञान को लगातार अद्यतन रखने के लिए वे इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, इंडियन चेस्ट सोसाइटी और यूरोपियन रेस्पिरेटरी सोसाइटी जैसी संस्थाओं से जुड़े रहे। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा सम्मेलनों में दो दशकों से अधिक समय तक उनकी सक्रिय सहभागिता रही।

उनकी सेवाओं के लिए 2024 का Award of Honour, टीबी उन्मूलन अभियान में योगदान का सम्मान, Corona Warrior of COVID-19 Award, Humanitarian of the Year Award-2022 और Outstanding Achievement in Healthcare Award-2023 सहित कई सम्मान बताए गए हैं। वर्तमान में डॉ. सिंह चिकित्सा के साथ शिक्षा क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। वे लखनऊ क्रिश्चियन कॉलेज में President/Secretary/Manager और Methodist Medical Council of India के Executive Secretary हैं। वे Methodist Hospital, प्रताप सागर, बक्सर तथा Sundaram Chikitsalaya, नगरा, बलिया में Medical Superintendent के दायित्व से भी जुड़े रहे हैं।

इसके अलावा Christian Medical College, Ludhiana और Christian Medical College, Vellore के Board of Governors में सदस्य के रूप में उनका जुड़ाव बताया गया है।सेवा और चिकित्सा की इसी पारिवारिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए डॉ. आरके सिंह ने अपने कार्यक्षेत्र में अलग पहचान बनाई है। 20 सितंबर को उनके जन्मदिन के अवसर पर उनकी जीवन-यात्रा चिकित्सा, सामाजिक सेवा और शिक्षा के बीच बने उस सेतु को रेखांकित करती है, जिसके केंद्र में मानव सेवा का भाव रहा है।

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