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मंदिरों की 17 एकड़ जमीन पर जमाबंदी के खेल का खुलासा, करोड़ों की संपत्ति रैयतों के नाम होने पर धार्मिक न्यास पर्षद सख्त

मुजफ्फरपुर, 31 अगस्त (संतोष गुप्ता) अहियापुर थाना क्षेत्र के मुशहरी की भिखनपुर पंचायत में देवी-देवताओं के नाम दर्ज करोड़ों रुपये की जमीन की कथित अवैध खरीद-बिक्री और जमाबंदी रैयतों के नाम किए जाने का मामला अब तूल पकड़ने लगा है। बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद ने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। पर्षद अध्यक्ष डॉ. रणवीर नंदन ने जमीन की अद्यतन स्थिति, संबंधित धार्मिक न्यास की चल-अचल संपत्ति तथा अभिलेखों के पंजी-दो से मिलान कर विस्तृत विवरण उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। 17 एकड़ से अधिक जमीन पर उठे सवाल नए सर्वे खतियान के अनुसार भिखनपुर में लक्ष्मीनारायण जी महाराज, शिवजी महाराज और राम जानकी जी महाराज के नाम कुल 17 एकड़ से अधिक जमीन दर्ज है।

आरोप है कि वर्ष 2007-08 के दौरान इस बेशकीमती जमीन की खरीद-बिक्री शुरू हो गई थी। लंबे समय तक जमीन की सरकारी रसीद भी देवी-देवताओं के नाम से ही कटती रही। पूर्व मुखिया उमाशंकर प्रसाद सिंह ने मामले की शिकायत डीएम, वरीय अधिकारियों और धार्मिक न्यास पर्षद से की थी, लेकिन आरोप है कि उस समय ठोस कार्रवाई नहीं हुई। 2019 में बदली जमाबंदी मामले की पड़ताल में कथित तौर पर सामने आया कि वर्ष 2019 में देवताओं के नाम दर्ज जमीन की जमाबंदी रैयतों के नाम स्थानांतरित कर दी गई। एक ही जमीन को लेकर दाखिल-खारिज आवेदनों पर अलग-अलग आदेश पारित किए जाने से अंचल कार्यालय की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।आरोप है कि तत्कालीन राजस्व कर्मचारी विश्वनाथ खरवार ने अपने सगे-संबंधियों के नाम भी उक्त जमीन की रजिस्ट्री कराई।

शिकायत के मुताबिक, इससे पहले दाखिल-खारिज के कई आवेदन अस्वीकृत किए जाते रहे, लेकिन परिजनों के नाम जमीन लिखे जाने के बाद रैयतों के नाम दाखिल-खारिज और जमाबंदी की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ी। अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में पूरे प्रकरण में तत्कालीन अंचलाधिकारी नागेंद्र कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि स्पष्ट साक्ष्यों के बावजूद अब तक प्रभावी प्रशासनिक कार्रवाई नहीं हुई। इससे संबंधित कर्मियों को कथित संरक्षण मिलने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही होगी।धार्मिक न्यास पर्षद की पहल के बाद अब करोड़ों की इस संपत्ति के रिकॉर्ड की जांच और कथित अनियमितताओं पर कार्रवाई को लेकर लोगों की नजर प्रशासनिक रिपोर्ट पर टिक गई है।

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