समस्तीपुर, 30अगस्त (रामबालक राय) प्रभात पुस्तकालय के संस्थापक एवं कविवर यदुनंदन रसिक की 21वीं पुण्यतिथि पर जितवारपुर स्थित प्रभात पुस्तकालय के सभागार में भावपूर्ण श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सेवानिवृत्त शिक्षक राम आशीष राय ने की, जबकि संचालन शिक्षक रामबालक राय ने किया। श्रद्धांजलि सभा में शिक्षकों, साहित्यकारों, ग्रामीणों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रबुद्धजनों ने कविवर के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को याद करते हुए उनके साहित्यिक योगदान को नमन किया।

कार्यक्रम की शुरुआत कविवर यदुनंदन रसिक के तैलचित्र पर उपस्थित लोगों द्वारा पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। स्कूली छात्रों ने भी उनके चित्र पर पुष्प अर्पित किए और कविवर की स्मृति में काव्य पाठ प्रस्तुत किया। बाल कवियों प्रज्ञा भारती सौम्या, जिशा यादव सहित अन्य ने अपनी कविताओं के माध्यम से साहित्य के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त कीं।श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि यदुनंदन रसिक ने अपनी रचनाओं के माध्यम से मानवीय संवेदना, सामाजिक सरोकार और लोक संस्कृति को प्रभावी अभिव्यक्ति दी। उनकी साहित्यिक रचनाएं आज भी पाठकों और नई पीढ़ी को प्रेरणा देने का काम कर रही हैं।

वक्ताओं ने कहा कि साहित्य और समाज के बीच मजबूत सेतु के रूप में उनकी भूमिका को भुलाया नहीं जा सकता।कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में प्रभात पुस्तकालय को पुनर्जीवित करने के लिए सदस्यता अभियान की शुरुआत भी की गई। आयोजकों ने कहा कि पुस्तकालय को फिर से सक्रिय और जनोपयोगी बनाने के लिए अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। इससे ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों और साहित्यप्रेमियों को अध्ययन एवं साहित्यिक गतिविधियों के लिए बेहतर मंच मिलने की उम्मीद है।

श्रद्धांजलि सभा में प्रो. दिनेश कुमार यादव, प्रो. उमाशंकर विद्यार्थी, विभागाध्यक्ष अंग्रेजी विभाग, समस्तीपुर महाविद्यालय, राम शोभित राय, डी.डी.ओ. कृष्ण कुमार, रजनीश कुमार, प्रधानाध्यापक विजय राय, अभियंता हरे कृष्णा रजक, निशांत कुमार, राजकुमार राय, वशिष्ठ, दिवाकर कुमार, वीरेंद्र कुमार सहित जितेंद्र राय मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान साहित्य, संस्कृति और पुस्तकालय परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया।














