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मंच पर बोलने का डर होगा खत्म, बिहार कृषि विश्वविद्यालय की अनोखी कार्यशाला में आत्मविश्वास बढ़ाने का मिला मंत्र

बक्सर, 06 जुलाई (विक्रांत) बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन टीचिंग एंड लर्निंग (CETL) द्वारा आयोजित ऑनलाइन कार्यशाला में विद्यार्थियों और शिक्षकों को प्रभावी सार्वजनिक भाषण की ऐसी बारीकियां सिखाई गईं, जिन्होंने मंच भय को आत्मविश्वास में बदलने का संदेश दिया। “प्रभावी सार्वजनिक भाषण कला: आत्मविश्वास के साथ प्रभावशाली संवाद” विषय पर आयोजित इस विशेष कार्यशाला में वक्ताओं ने बताया कि सफल वक्तृत्व केवल शब्दों का खेल नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, मानसिक संतुलन और प्रभावी संवाद की कला है।

कार्यशाला की मुख्य वक्ता पांडिचेरी विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एवं मास कम्युनिकेशन विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष (प्रभारी) डॉ. राधिका खन्ना ने संवादात्मक शैली में प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि मंच पर होने वाली घबराहट का सबसे बड़ा कारण आत्म-संदेह, अत्यधिक सोच और दूसरों के मूल्यांकन का भय होता है। उन्होंने प्रतिभागियों को गलतियों से डरने के बजाय अपने संदेश की गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी।कार्यशाला के दौरान डॉ. खन्ना ने मंच भय दूर करने के व्यावहारिक उपाय भी बताए। उन्होंने बॉक्स ब्रीदिंग और भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास कराते हुए समझाया कि नियंत्रित श्वास-प्रश्वास शरीर के पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम को सक्रिय करता है, जिससे व्यक्ति शांत, संयमित और एकाग्र होकर प्रभावशाली ढंग से अपनी बात रख सकता है।

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक भाषण में सफलता का आधार नियमित अभ्यास, वर्तमान क्षण में रहने की आदत और स्वयं पर विश्वास है।उन्होंने प्रभावी भाषण की शुरुआत, प्रभावशाली समापन, उचित विराम, स्पष्ट उच्चारण और श्रोताओं से भावनात्मक जुड़ाव के महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की। उनका कहना था कि आत्मविश्वास कोई जन्मजात गुण नहीं, बल्कि निरंतर अभ्यास और सकारात्मक सोच से विकसित होने वाली क्षमता है।कार्यशाला का समापन प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने मंच भय, प्रभावी प्रस्तुति और व्यावसायिक संप्रेषण कौशल से जुड़े कई सवाल पूछे। प्रतिभागियों ने कार्यक्रम की व्यावहारिक और अनुभवात्मक शैली की सराहना करते हुए इसे अत्यंत प्रेरणादायक बताया। कार्यक्रम में एमबीए (एग्रीबिजनेस), स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों तथा संकाय सदस्यों सहित कुल 48 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। यह कार्यशाला कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह के संरक्षण में आयोजित की गई। कार्यक्रम की संयोजक डॉ. श्वेता शांभवी थीं, जबकि समन्वयन एवं संचालन डॉ. आदित्य सिन्हा ने किया।

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