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भारत की नारियाँ

आज साहित्यिक आँगन गीत गुंजन में राष्ट्रीय राजधानी, नई दिल्ली से सुप्रसिद्ध कवयित्री अंशु विनोद गुप्ता जी की घनाक्षरी छन्द

1.धरती पे दानवों के, दौड़ते समूह देख,

    आग सी बरसती हैं, भारत की नारियाँ ।

    रणचण्डी बनकर, शत्रु की पुकार पर,

    शेर सी गरजती हैं, भारत की नारियाँ।

    बालक को बाँध पीठ, और ले कटार हाथ,

    मार-काट करती हैं, भारत की नारियाँ।

    छोड़ के श्रृंगार गीत, वीरता का कर गान,

    ललकार भरती हैं, भारत की नारियाँ ।

    2. माटी को दुलार करें, नज़र आकाश पर,

    राकेट उड़ान पर भारत की नारियाँ।

    देश सेवा मातु देवा, सेवा भाव कूट कूट,

    सपने सजा ही लेतीं भारत की नारियाँ।

    कैसा भी हो काम दे दो कठिन सरलतम,

    पूरा करके ही आती, भारत की नारियाँ।

    बर्फानी चोटी हो या कोयला खदान खोदें,

    सागर सूनामी जैसी भारत की नारियाँ।

    ~ अंशु विनोद गुप्ता

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