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चमचागीरी

साहित्यिक आँगन गीत गुंजन में उत्तर प्रदेश, इटावा से सुप्रसिद्ध कवि प्रमोद तिवारी हंस जी की एक गीत

एक गीत जो सुख चमचागीरी में ।

वो सुख कहां अमीरी में।

नहीं फिक्र धन रखवाली की।

रोकड़ बही असल-जाली की।

दौलत उजली या काली की।

हो अलमस्त गुजारो जीवन –

जोड़े हाथ हुजूरी में ।

इधर -उधर की करो बुराई।

पर मालिक की करो बड़ाई।

छक कर खाओ दूध मलाई।

नजर झुका कर पड़ो सामने-

चूमो चरण अखीरी में।

खुद को बस अनाथ बतलाओ।

उनको समरथवान बताओ।

उनको अपना दर्द सुनाओ।

जेब भरो पर उन्हें दिखाओ-

कटता समय फकीरी में।

~ प्रमोद तिवारी हंस

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