पटना, 18 जून (अविनाश कुमार) बिहार सरकार ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए डॉक्टरों को सख्त संदेश दिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों के चिकित्सकों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि बिना गंभीर चिकित्सीय कारण के मरीजों को बड़े अस्पतालों में रेफर करने की प्रवृत्ति तत्काल बंद की जाए। सरकार ने चेतावनी दी है कि अनावश्यक रेफरल करने वाले डॉक्टरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुमंडल और जिला स्तर के अस्पतालों में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं का पूरा उपयोग किया जाए। छोटी और सामान्य बीमारियों से पीड़ित मरीजों को सीधे पटना या अन्य बड़े मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में भेजना उचित नहीं है।

इससे बड़े अस्पतालों पर अनावश्यक दबाव बढ़ता है और मरीजों को भी आर्थिक व मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।सरकार का उद्देश्य है कि अधिकतम मरीजों का इलाज उनके जिले और अनुमंडल स्तर पर ही हो, ताकि उन्हें बेहतर और त्वरित स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। मुख्यमंत्री ने सभी अस्पताल प्रबंधन को अपनी जिम्मेदारी गंभीरता से निभाने और स्थानीय स्तर पर चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत करने का निर्देश दिया है।इस नई व्यवस्था की निगरानी के लिए मुख्य सचिव और सभी जिलों के जिलाधिकारियों (डीएम) को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। अधिकारियों को नियमित समीक्षा करने, अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर नजर रखने तथा यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि केवल गंभीर और जटिल मामलों में ही मरीजों को उच्च संस्थानों में रेफर किया जाए।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि जांच में पाया गया कि किसी डॉक्टर ने बिना उचित चिकित्सीय कारण के मरीज को रेफर किया है, तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ अन्य दंडात्मक कदम भी उठाए जाएंगे। सरकार इस मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करेगी।राज्य सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए 15 अगस्त तक की समय-सीमा निर्धारित की है। मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि इस पहल से जिला और अनुमंडलीय अस्पतालों की कार्यक्षमता बढ़ेगी, मरीजों को अपने क्षेत्र में ही गुणवत्तापूर्ण इलाज मिलेगा तथा बड़े अस्पतालों पर पड़ने वाला अतिरिक्त बोझ भी काफी हद तक कम होगा।













