नालंदा, 15 जून (अविनाश पांडेय) जिले की विश्वविख्यात बावन बूटी साड़ी को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग मिलने के बाद बुनकरों में खुशी की लहर दौड़ गई है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद बिहार सरकार के ग्रामीण विकास, सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री तथा जदयू विधायक दल के नेता श्रवण कुमार सोमवार को बिहारशरीफ प्रखंड के बसवन बिगहा पहुंचे और बावन बूटी कला से जुड़े बुनकरों से मुलाकात कर उन्हें बधाई दी। इस अवसर पर मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि जीआई टैग मिलना नालंदा की पहचान और बुनकरों की वर्षों की मेहनत का सम्मान है। अब नालंदा की बावन बूटी साड़ी देश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी विशिष्ट पहचान के साथ पहुंचेगी।

उन्होंने कहा कि जीविका के माध्यम से सरकारी कार्यक्रमों में अंगवस्त्र के रूप में बावन बूटी उत्पादों का उपयोग किया जाएगा तथा ग्राम श्री मेलों में विशेष स्टॉल लगाकर इस कला का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा।मंत्री ने कहा कि बावन बूटी की कारीगरी सदियों पुरानी विरासत है, जिसमें बुनकरों की कला, परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर की झलक दिखाई देती है। जीआई टैग मिलने से नकली उत्पादों पर रोक लगेगी और असली बुनकरों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य प्राप्त होगा। सरकार मार्केटिंग, डिजाइन विकास, प्रशिक्षण और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़कर बुनकरों की आय बढ़ाने के लिए हरसंभव सहायता प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि बसवन बिगहा और नेपुरा गांव के बुनकर बिहार का गौरव हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस कला को संरक्षण और प्रोत्साहन देने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। राज्य सरकार इस धरोहर को संरक्षित और विकसित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।सांसद कौशलेंद्र कुमार ने कहा कि सरकार की योजनाओं से बुनकर आत्मनिर्भर बन रहे हैं। उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए हर संभव सहयोग दिया जाएगा। वहीं लाखों देवी ने कहा कि पद्मश्री स्वर्गीय कपिल देव कामत के अथक प्रयासों से बावन बूटी कला को राष्ट्रीय पहचान मिली थी। अब जीआई टैग मिलने से बुनकरों का वर्षों पुराना सपना साकार होता दिखाई दे रहा है।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बुनकर, महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्याएं तथा कई सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।














