Image

आँधी

आज साहित्यिक आँगन गीत गुंजन में राजस्थान, जयपुर से सुप्रसिद्ध कवयित्री अनामिका कली जी की एक गीतिका

देखो आँधी आई बड़ी भली।

भारी टीनों को ले उड़ी चली।

धूली गुब्बारे हैं उड़े कई,

दिन में संध्या सी है लगे ढली।

सारे बच्चे लगते डरे-डरे,

नयनों से असुअन झड़ी झली।

सब चीजों पर धूला लगे चढ़ी,

जो चीजें थीं पहले धुली-धुली।

आताताई आँधी करे दुखी,

सबके मन में मचती खली-बली।

बारिश लेकर आई खुशी नई,

तब दुनिया लगती खिली-खिली।

आँधी बारिश तांडव डरा गया,

इसमें पेड़ों की भी चढ़े बली।

~ अनामिका कली

Releated Posts

भारत की नारियाँ

आज साहित्यिक आँगन गीत गुंजन में राष्ट्रीय राजधानी, नई दिल्ली से सुप्रसिद्ध कवयित्री अंशु विनोद गुप्ता जी की…

ByByअशोक अश्क जुलाई 2, 2026

नशे में नशा कर रहे हो

आज साहित्यिक आँगन गीत गुंजन में बिहार, समस्तीपुर से सुप्रसिद्ध कवि प्रवीण कुमार ‘चुन्नू’ जी की एक ग़ज़ल…

ByByअशोक अश्क जून 24, 2026

रात दिन रहता है तेरी याद का दफ्तर खुला

आज साहित्यिक आँगन गीत गुंजन में पश्चिम बंग, आसनसोल से सुप्रसिद्ध शायरा ग़़ज़ाला तबस्सुम जी की एक ग़ज़ल…

ByByअशोक अश्क जून 21, 2026

पापा

आज साहित्यिक आँगन गीत गुंजन में बिहार, बेगूसराय से सुप्रसिद्ध कवयित्री डॉ सुनीता ‘सुमन’ जी की एक कविता…

ByByअशोक अश्क जून 20, 2026

Leave a Reply

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Scroll to Top