आज साहित्यिक आँगन गीत गुंजन में राजस्थान, जयपुर से सुप्रसिद्ध कवयित्री अनामिका कली जी की एक गीतिका

देखो आँधी आई बड़ी भली।
भारी टीनों को ले उड़ी चली।
धूली गुब्बारे हैं उड़े कई,
दिन में संध्या सी है लगे ढली।
सारे बच्चे लगते डरे-डरे,
नयनों से असुअन झड़ी झली।
सब चीजों पर धूला लगे चढ़ी,
जो चीजें थीं पहले धुली-धुली।
आताताई आँधी करे दुखी,
सबके मन में मचती खली-बली।
बारिश लेकर आई खुशी नई,
तब दुनिया लगती खिली-खिली।
आँधी बारिश तांडव डरा गया,
इसमें पेड़ों की भी चढ़े बली।
~ अनामिका कली

















