आज साहित्यिक आँगन गीत गुंजन में मध्यप्रदेश, भोपाल से सुप्रसिद्ध कवयित्री अलका ‘ राज़ ‘अग्रवाल जी की एक ग़ज़ल

बुलन्दियों पे ये क़िस्मत अगर नहीं होती ।
तो कामयाबी शरीके सफ़र नहीं होती ।।
जो दर्द होता नहीं चश्मे तर नहीं होती ,
कहानी प्यार की भी मोतेबर नहीं होती ।।
अगर चे करना भी चाहें कसर नहीं होती ,
कहानी प्यार की क्यूँ मुख़्तसर नहीं होती ।।
जिन्हें भरोसा है उस पाक लोग के ऊपर ,
दुआ भी उनकी कभी बे असर नहीं होती ।।
अमीर लोगों की रख्खेल है सियासत पर ,
ग़रीब लोगों पे उसकी नज़र नहीं होती ।।
मरीज़ ए हिज्र तो दुनिया से उठ गये होते ,
दवाई आप की गर कार गर नहीं होती ।।
अगर ये दिल नहीं शक़ होता अपना “राज़” कभी ,
ये बे रूख़ी भी कभी इस क़दर नहीं होती।।
~ अलका ‘ राज़ ‘अग्रवाल

















