लखनऊ, 06 जून (सेंट्रल डेस्क) राजधानी के प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में मरीजों को एक साथ पांच-पांच स्टेंट लगाए जाने के मामलों ने स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा दिया है। आयुष्मान भारत योजना के तहत हुए इन उपचारों में संभावित अनियमितता और वित्तीय गड़बड़ी की आशंका के बीच जांच तेज कर दी गई है। KGMU के लारी कार्डियोलॉजी विभाग में स्टेंट प्रत्यारोपण से जुड़े मामलों की जांच के लिए गठित पांच सदस्यीय समिति ने विभाग से पिछले एक वर्ष में हुई सभी एंजियोप्लास्टी और स्टेंट प्रत्यारोपण का विस्तृत रिकॉर्ड तलब किया है। प्रारंभिक जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।

जानकारी के अनुसार कुछ मरीजों को बार-बार भर्ती कर अलग-अलग चरणों में स्टेंट लगाए गए, जबकि उनकी मेडिकल हिस्ट्री और उपचार संबंधी दस्तावेजों में भी गंभीर विसंगतियां पाई गई हैं।सूत्रों के मुताबिक अब तक करीब 15 ऐसे मरीजों की पहचान हुई है, जिन्हें पांच-पांच स्टेंट लगाए गए थे। समिति इस बात की गहन पड़ताल कर रही है कि इतने अधिक स्टेंट लगाना चिकित्सकीय दृष्टि से आवश्यक था या नहीं तथा क्या उपचार निर्धारित मानकों और प्रोटोकॉल के अनुरूप किया गया। जांच के दायरे में आयुष्मान भारत समेत विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के तहत हुए भुगतान, उपचार प्रक्रिया, बजट उपयोग और अनुमोदन प्रणाली को भी शामिल किया गया है। मरीजों की फाइलें, एंजियोग्राफी रिपोर्ट और एंजियोप्लास्टी दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है।

KGMU के प्रवक्ता डॉ. के. के. सिंह ने बताया कि पांच-पांच स्टेंट लगाए जाने के मामले सामने आए हैं। आयुष्मान कार्ड और मरीजों के रिकॉर्ड का मिलान कर यह पता लगाया जा रहा है कि आखिर एक ही मरीज को इतने अधिक स्टेंट किस आधार पर लगाए गए और भुगतान कैसे स्वीकृत हुआ। जांच रिपोर्ट के बाद पूरे मामले में बड़ा खुलासा होने की संभावना जताई जा रही है।

















