रांची, 23 जून (मोहन शर्मा) झारखंड में लाखों राशन कार्डधारियों के लिए बड़ी खबर है। राज्य सरकार ने ऐसे 8 लाख से अधिक राशन कार्डों की पहचान की है, जिनके धारकों ने पिछले छह महीने से लेकर एक वर्ष या उससे अधिक समय से सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत राशन नहीं लिया है। अब इन कार्डों को रद्द किए जाने की तैयारी शुरू हो गई है, जिससे पूरे राज्य में हड़कंप मच गया है।खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग के अनुसार कुल 8,02,685 ऐसे राशन कार्डधारियों को चिन्हित किया गया है, जो लंबे समय से योजना का लाभ नहीं उठा रहे हैं। विभाग को आशंका है कि इनमें बड़ी संख्या में डुप्लीकेट, निष्क्रिय या अपात्र लाभुक शामिल हो सकते हैं। इसी को लेकर राज्यभर में विशेष सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है।

विभागीय आंकड़ों के मुताबिक अब तक 4.61 लाख से अधिक कार्डधारियों का भौतिक सत्यापन किया जा चुका है। जांच के दौरान 21,750 डुप्लीकेट राशन कार्ड और 12,284 संदिग्ध कार्ड सामने आए हैं। पूर्वी सिंहभूम, गिरिडीह और पश्चिमी सिंहभूम जिलों में ऐसे मामलों की संख्या सबसे अधिक पाई गई है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन लाभुकों का सत्यापन नहीं हो पाएगा या जो लंबे समय से राशन नहीं ले रहे हैं, उनके कार्ड रद्द किए जा सकते हैं। साथ ही राशन कार्ड में नया नाम जोड़ने के लिए आधार आधारित ई-केवाईसी और बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। बिना सत्यापन अब किसी भी नए सदस्य का नाम कार्ड में नहीं जोड़ा जाएगा। सरकार ने आर्थिक रूप से सक्षम लोगों को भी चेतावनी जारी की है।

चार पहिया वाहन रखने वाले, पांच एकड़ या उससे अधिक भूमि के मालिक तथा आयकर दाता लोगों से 30 जून तक स्वेच्छा से राशन कार्ड सरेंडर करने को कहा गया है। निर्धारित समय तक ऐसा नहीं करने पर जांच के दौरान पकड़े जाने पर लाभ की राशि की वसूली भी की जा सकती है। विभाग का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य फर्जी और निष्क्रिय कार्ड हटाकर वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। राज्य में फिलहाल 5.50 लाख से अधिक नए राशन कार्ड और नाम जोड़ने के आवेदन लंबित हैं, जिन्हें जल्द लाभ मिलने की उम्मीद है।

















