पटना, 12 जून (पटना डेस्क) राजस्थान की लोकसंस्कृति को देश-दुनिया में नई पहचान दिलाने वाली प्रसिद्ध ‘मांड’ गायिका गवरी देवी का गुरुवार शाम 98 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही राजस्थान के लोकसंगीत और कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई। दशकों तक अपनी मधुर आवाज से श्रोताओं के दिलों पर राज करने वाली गवरी देवी के जाने से लोकसंगीत की एक अमूल्य धरोहर हमेशा के लिए खामोश हो गई। जानकारी के अनुसार गवरी देवी ने पाली स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से ‘मांड’ गायकी के क्षेत्र में सक्रिय थीं और अपने अद्भुत गायन से राजस्थान की लोक परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

उनके गीतों और सुरों ने न केवल राजस्थान बल्कि देशभर के संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध किया।उनके निधन पर भजन लाल शर्मा ने गहरा शोक व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गवरी देवी का जाना राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत और लोकसंगीत जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा कि अपनी स्वर साधना और लोकगीतों के माध्यम से उन्होंने राज्य की समृद्ध लोक संस्कृति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। लोककला के संरक्षण और संवर्धन में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।वहीं पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी गवरी देवी के निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ‘मांड’ गायकी को वैश्विक पहचान दिलाने में गवरी देवी की भूमिका अतुलनीय रही है।

कई दशकों तक उन्होंने इस लोकगायन शैली को जीवंत बनाए रखा और कला जगत में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की। गवरी देवी के निधन से राजस्थान के कला एवं संस्कृति क्षेत्र को गहरा आघात पहुंचा है। उनके चाहने वालों का मानना है कि भले ही आज उनका स्वर थम गया हो, लेकिन उनकी सुरमयी विरासत और लोकगीतों की अमिट छाप आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेगी। उनके निधन पर विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और संगीत संस्थाओं ने भी शोक व्यक्त किया है।

















