समस्तीपुर, 02 जून (हर्षिता “अश्क”) जिले में आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं के समक्ष गंभीर आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। कई महीनों से मानदेय का भुगतान नहीं होने के कारण सैकड़ों कर्मियों की दैनिक जिंदगी प्रभावित हो रही है। बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं की देखभाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली ये कर्मी अब खुद आर्थिक तंगी का सामना करने को मजबूर हैं।सेविकाओं ने बताया कि कई कर्मियों को पिछले वर्ष नवंबर माह से तो कई को जनवरी से मानदेय नहीं मिला है। लगातार भुगतान लंबित रहने से परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है।

बच्चों की पढ़ाई, इलाज और घरेलू जरूरतों को पूरा करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई सेविकाओं ने कहा कि स्थानीय दुकानदार भी अब उधार देने से इनकार करने लगे हैं, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई है। आंगनबाड़ी कर्मियों का आरोप है कि वे नियमित रूप से केंद्रों का संचालन कर रही हैं तथा विभाग द्वारा सौंपे गए सभी कार्य पूरी जिम्मेदारी और निष्ठा के साथ निभा रही हैं। इसके बावजूद समय पर मानदेय नहीं मिलने से उनमें गहरा असंतोष व्याप्त है। उनका कहना है कि लगातार हो रही देरी से उनका मनोबल प्रभावित हो रहा है और परिवार की आर्थिक स्थिति डगमगा गई है।

मामले पर प्रखंड बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) मधु प्रिया ने कहा कि मानदेय रोकने की कोई मंशा नहीं है। उन्होंने बताया कि आवंटन में देरी और कुछ तकनीकी कारणों से भुगतान प्रक्रिया प्रभावित हुई है। विभाग लंबित मामलों के निष्पादन में जुटा हुआ है तथा जल्द ही बकाया राशि सेविकाओं और सहायिकाओं के बैंक खातों में भेज दी जाएगी। फिलहाल विभाग के आश्वासन से कर्मियों में उम्मीद जगी है, लेकिन सभी की निगाहें अब जल्द मानदेय भुगतान पर टिकी हुई हैं।


















