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आलू का खरीदार न मिलना किसानों के लिए आफत: सड़कों पर फेंकनी पड़ रही फसल, बंदरा के अन्नदाता बदहाली से बेहाल

मुजफ्फरपुर, 31 मई (संतोष गुप्त) जिले के बंदरा प्रखंड में इस बार आलू की बंपर पैदावार किसानों के लिए खुशियां नहीं, बल्कि मुसीबत लेकर आई है। खेतों में कड़ी मेहनत, महंगे बीज, खाद और सिंचाई पर भारी खर्च करने के बावजूद किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि बड़ी मात्रा में आलू सड़ने लगा है और किसान मजबूरी में उसे सड़कों व खेतों के किनारे फेंकने को विवश हैं। रामपुरदयाल गांव के किसान रौशन कुशवाहा और तेपरी गांव के किसान मनीष ठाकुर ने बताया कि इस वर्ष आलू की पैदावार काफी अच्छी हुई थी।

किसानों को उम्मीद थी कि अच्छी फसल से उन्हें बेहतर मुनाफा मिलेगा, लेकिन बाजार में मांग नहीं होने और खरीदारों की कमी के कारण अब लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। किसानों के अनुसार, बेहतर दाम मिलने की उम्मीद में उन्होंने अपनी फसल का कुछ हिस्सा कोल्ड स्टोरेज में रखा था, जबकि शेष आलू घरों में सुरक्षित रखकर बाजार भाव बढ़ने का इंतजार कर रहे थे। लेकिन क्षेत्र में पर्याप्त कोल्ड स्टोरेज और संगठित मंडी की व्यवस्था नहीं होने से उनकी उम्मीदें टूट गई। भीषण गर्मी के कारण घरों में रखा लगभग 50 प्रतिशत आलू खराब होने की कगार पर पहुंच चुका है। किसान रोजाना सड़े हुए आलू छांटकर बाहर फेंक रहे हैं।

स्थिति का फायदा स्थानीय बिचौलिए और व्यापारी उठा रहे हैं। किसान बताते हैं कि उन्हें औने-पौने दाम पर आलू बेचने के लिए मजबूर किया जा रहा है। यदि वे इस कीमत पर फसल बेचते हैं, तो परिवहन और मजदूरी का खर्च भी उनकी जेब से जाएगा।आर्थिक संकट और कर्ज के बोझ से जूझ रहे किसानों ने जिला प्रशासन और सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। किसानों ने सरकारी खरीद केंद्र खोलने, स्थानीय स्तर पर आधुनिक कोल्ड स्टोरेज और बड़ी कृषि मंडी स्थापित करने की मांग उठाई है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो आने वाले वर्षों में क्षेत्र के अधिकांश किसान आलू की खेती छोड़ने को मजबूर हो जाएंगे।

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