पटना, 26 मई (अविनाश कुमार) बिहार की सियासत में एक बार फिर चुनावी तापमान चढ़ने वाला है। भारत निर्वाचन आयोग ने बिहार विधान परिषद की 9 सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव और एक सीट पर उपचुनाव का कार्यक्रम जारी कर दिया है। चुनावी तारीखों की घोषणा होते ही राजनीतिक दलों ने अंदरखाने रणनीति बनानी शुरू कर दी है और सत्ता से लेकर विपक्ष तक सरगर्मी तेज हो गई है। निर्वाचन आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार 29 जून 2026 को 9 विधान पार्षदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इन सीटों के लिए 1 जून को अधिसूचना जारी की जाएगी।

उम्मीदवार 8 जून तक नामांकन दाखिल कर सकेंगे, जबकि 9 जून को नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी होगी। 11 जून तक नाम वापस लेने की अंतिम तिथि तय की गई है। इसके बाद 18 जून को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान कराया जाएगा और उसी दिन मतगणना भी होगी। पूरी चुनाव प्रक्रिया 20 जून तक समाप्त कर ली जाएगी। सबसे अधिक चर्चा उस सीट के उपचुनाव को लेकर हो रही है, जो पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। राज्यसभा सदस्य बनने के बाद उन्होंने विधान परिषद की सदस्यता छोड़ दी थी।

इस सीट पर चुने जाने वाले सदस्य का कार्यकाल 6 मार्च 2030 तक रहेगा।जिन नेताओं का कार्यकाल समाप्त हो रहा है उनमें डॉ. कुमुद वर्मा, प्रो. गुलाम गौस, मो. फारूक, भीष्म साहनी, श्रीभगवान सिंह कुशवाहा, संजय मयूख, समीर कुमार सिंह, सम्राट चौधरी और सुनील कुमार सिंह शामिल हैं। इनमें से सम्राट चौधरी और श्रीभगवान सिंह कुशवाहा विधानसभा चुनाव जीतने के बाद पहले ही परिषद सदस्य पद से इस्तीफा दे चुके हैं। चुनाव की घोषणा के साथ ही बिहार में राजनीतिक समीकरणों की नई बिसात बिछनी शुरू हो गई है। कौन किसे टिकट देगा, कौन किस खेमे में जाएगा और किसकी होगी जीत—इसको लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।

















