समस्तीपुर, 22 मई (हर्षिता “अश्क”) मोरवा प्रखंड में सरकारी सिस्टम की बड़ी लापरवाही ने एक जिंदा इंसान की जिंदगी को बदतर बना दिया है। धर्मपुर बांदे पंचायत के वार्ड संख्या 18 निवासी रामजी सिंह पिछले तीन वर्षों से सरकारी कागजों में खुद को “जिंदा” साबित करने के लिए दफ्तर-दफ्तर भटक रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया, जबकि उनकी मौत नहीं बल्कि उनकी बेटी का निधन हुआ था। बताया गया है कि वर्ष 2023 में रामजी सिंह की पुत्री रेखा कुमारी की बीमारी से मौत हो गई थी। बेटी के बैंक खाते में जमा करीब चार हजार रुपये निकालने के लिए मृत्यु प्रमाण पत्र की जरूरत थी।

इसके लिए रामजी सिंह ने स्थानीय आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 146 की सेविका पूनम कुमारी और वार्ड सदस्य को सभी आवश्यक कागजात सौंपे थे। लेकिन सरकारी लापरवाही का आलम देखिए कि मृत बेटी की जगह जीवित पिता रामजी सिंह का ही डेथ सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया। 27 फरवरी 2023 को जारी प्रमाण पत्र में साफ तौर पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। इस गलती का असर धीरे-धीरे उनकी पूरी जिंदगी पर पड़ने लगा।सरकारी रिकॉर्ड में मृत दर्ज होते ही उनका बैंक खाता फ्रीज हो गया, राशन कार्ड निष्क्रिय कर दिया गया और आधार कार्ड भी सस्पेंड हो गया।

तीन साल तक वह समझ ही नहीं पाए कि आखिर उनके अधिकार क्यों छीने जा रहे हैं। जब सच्चाई सामने आई तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। शुक्रवार को रामजी सिंह अपनी ही मौत का प्रमाण पत्र लेकर प्रखंड कार्यालय पहुंचे और बीडीओ से न्याय की गुहार लगाई। जिंदा इंसान को खुद को “जिंदा” साबित करने की यह कहानी अब सरकारी सिस्टम पर बड़े सवाल खड़े कर रही है।

















