पटना, 14 मई (पटना डेस्क) सोन नदी में नियमों को ताक पर रखकर किए जा रहे अंधाधुंध बालू खनन ने अब भयावह रूप ले लिया है। हालात ऐसे हैं कि नदी में जगह-जगह 20 से 30 मीटर तक गहरे गड्ढे बन गए हैं, जिन्हें स्थानीय लोग ‘मौत के कुएं’ कह रहे हैं। आरोप है कि खनन विभाग सिर्फ कागजों तक सीमित है, जबकि बालू संवेदक एनजीटी के नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। अजीमाबाद, संदेश, चांदी, कोईलवर और बबुरा थाना क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर मशीनों से अवैध खनन जारी है।

नियमों के अनुसार तीन मीटर से अधिक गहराई तक खनन की अनुमति नहीं है, लेकिन नदी का सीना चीरकर कई गुना अधिक गहरे गड्ढे खोदे जा रहे हैं। खनन के बाद इन्हें भरा भी नहीं जा रहा, जिससे बारिश और बाढ़ के दौरान ये जानलेवा जलकुंड बन जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल इन गड्ढों में डूबकर कई लोगों की मौत हो रही है, लेकिन प्रशासन कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा। तीर्थकोल, नूरपुर, खनगांव, बहियारा और कोईलवर रेल पुल के पास हुए कई दर्दनाक हादसे अब भी लोगों के जहन में ताजा हैं। हाल के वर्षों में अभिषेक, गुलशन कुमार, साकिब समेत कई लोगों की जान गहरे पानी में समाने से जा चुकी है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पानी सने बालू को भारी ट्रकों से ढोने के कारण सड़कें भी टूट रही हैं। लोगों ने अवैध खनन पर तत्काल रोक, घाटों पर चेतावनी बोर्ड और सुरक्षा इंतजाम की मांग की है। लगातार हो रही मौतों के बावजूद प्रशासनिक सख्ती नहीं होने से लोगों में भारी आक्रोश है।













