मुजफ्फरपुर, 08 मई (संतोष गुप्ता) तिरहुत प्रमंडल के तीन सौ से अधिक निजी स्कूलों पर शिक्षा विभाग की बड़ी कार्रवाई की तलवार लटक गई है। फीस वृद्धि, किताब और पोशाक के नाम पर अभिभावकों से मनमानी वसूली की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। प्रमंडलीय आयुक्त के निर्देश के बाद जिला शिक्षा अधिकारी पूरी तरह सक्रिय हो गए हैं और चिह्नित स्कूलों के प्रबंधन तथा प्राचार्यों से जवाब-तलब शुरू कर दिया गया है। शिक्षा विभाग की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कई निजी विद्यालय निर्धारित नियमों को दरकिनार कर अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रहे हैं।

विभाग ने ऐसे करीब 300 स्कूलों को चिह्नित किया है, जहां फीस बढ़ोतरी और अनियमित वसूली की शिकायतें सबसे ज्यादा मिली हैं। अब इन स्कूलों से विस्तृत जवाब मांगा जा रहा है। जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।अधिकारियों ने बताया कि बिहार निजी विद्यालय शुल्क (विनियमन) अधिनियम 2019 के तहत निजी स्कूल हर वर्ष अधिकतम सात प्रतिशत तक ही फीस बढ़ा सकते हैं। इसके बावजूद कई स्कूलों द्वारा नियमों की अनदेखी कर भारी शुल्क वसूले जाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही थी। कई अभिभावकों ने यह भी आरोप लगाया कि स्कूल प्रबंधन तय दुकानों से ही किताब और पोशाक खरीदने का दबाव बना रहे हैं।

प्रमंडलीय आयुक्त ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने जिलों में निजी विद्यालयों की नियमित निगरानी करें और फीस, किताब तथा यूनिफॉर्म से जुड़ी व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा करें। साथ ही निर्धारित प्रारूप में रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा गया है, ताकि गड़बड़ी पाए जाने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।शिक्षा विभाग की इस सख्ती के बाद निजी स्कूल संचालकों में बेचैनी बढ़ गई है। कई स्कूल प्रबंधन अब अपने रिकॉर्ड दुरुस्त करने में जुट गए हैं। वहीं अभिभावकों में उम्मीद जगी है कि विभागीय कार्रवाई से मनमानी फीस वसूली पर रोक लगेगी और उन्हें आर्थिक राहत मिलेगी।अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जांच के बाद किन स्कूलों पर कार्रवाई की गाज गिरती है और कितने संस्थानों की मान्यता तक खतरे में पड़ सकती है।













