पटना, 08 मई (अविनाश कुमार) बिहार की राजनीति में हालिया मंत्रिमंडल विस्तार के बाद अब विभागों के बंटवारे ने सत्ता समीकरणों की नई तस्वीर पेश कर दी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में गठित एनडीए सरकार में भाजपा और जदयू के बीच अहम विभागों का संतुलित बंटवारा किया गया है। राजनीतिक गलियारों में इसे आगामी चुनावी रणनीति और सहयोगी दलों को साधने की बड़ी कवायद माना जा रहा है। नई कैबिनेट में भाजपा के 15 नेताओं को मंत्री बनाया गया है, जबकि जनता दल यूनाइटेड के 13 मंत्री शामिल किए गए हैं। वहीं लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) से दो, जबकि हम (सेक्युलर) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा से एक-एक मंत्री को जगह दी गई है।

सबसे ज्यादा चर्चा विभागों के बंटवारे को लेकर हो रही है। भाजपा ने गृह, शिक्षा और कृषि जैसे महत्वपूर्ण विभाग अपने पास रखे हैं, जबकि जदयू को वित्त, स्वास्थ्य, परिवहन और समाज कल्याण जैसे बड़े विभाग दिए गए हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सामान्य प्रशासन, गृह, कैबिनेट सचिवालय, सतर्कता और नागरिक उड्डयन जैसे अहम विभाग अपने पास रखे हैं। पूर्व डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा को कृषि विभाग सौंपा गया है, जबकि दिलीप कुमार जायसवाल को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग मिला है। भाजपा नेता श्रेयसी सिंह को उद्योग और खेल विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं मिथिलेश तिवारी को शिक्षा विभाग सौंपा गया है। जदयू खेमे में विजय कुमार चौधरी को जल संसाधन और संसदीय कार्य विभाग मिला है, जबकि बिजेंद्र प्रसाद यादव वित्त एवं वाणिज्यिक कर विभाग संभालेंगे।

पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को स्वास्थ्य विभाग देकर नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने का संकेत दिया गया है। इसके अलावा संतोष कुमार सुमन को लघु जल संसाधन विभाग और दीपक प्रकाश को पंचायती राज विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विभागीय बंटवारा केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक संतुलन साधने की बड़ी रणनीति का हिस्सा है।













