पटना, 02 मई (अविनाश कुमार) बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने आखिरकार सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) और सहायक लोक स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन पदाधिकारी की बहुचर्चित परीक्षा को रद्द कर दिया है। परीक्षा में बड़े पैमाने पर कदाचार और गड़बड़ी के आरोपों के बाद आयोग ने यह सख्त फैसला लिया, जिससे लाखों अभ्यर्थियों के बीच हड़कंप मच गया है। आयोग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, इस मामले में राज्य के 6 जिलों में कुल 8 एफआईआर दर्ज की गई है। साथ ही 32 परीक्षार्थियों को दोषी पाते हुए उन्हें आयोग की भविष्य की सभी परीक्षाओं से प्रतिबंधित कर दिया गया है।

सबसे बड़ा खुलासा मुंगेर जिले से हुआ, जहां परीक्षा के दौरान ब्लूटूथ और अन्य हाईटेक उपकरणों के जरिए नकल कराने का संगठित प्रयास सामने आया। हालांकि प्रशासन की सतर्कता के कारण इस नेटवर्क को समय रहते पकड़ लिया गया। जांच में अब तक 36 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें अकेले मुंगेर से 22 आरोपी शामिल हैं। गौरतलब है कि AEDO के 935 पदों के लिए 14 से 21 अप्रैल के बीच 9 पालियों में परीक्षा आयोजित की गई थी, जबकि अपशिष्ट प्रबंधन पदाधिकारी की परीक्षा 23 अप्रैल को हुई थी। इस भर्ती के लिए रिकॉर्ड 10 लाख 97 हजार अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था, जिससे इसका महत्व और भी बढ़ गया था।

सूत्रों के मुताबिक, परीक्षा शुरू होने से एक दिन पहले ही मुंगेर के डीएम को गड़बड़ी की सूचना मिल गई थी, जिसके बाद कार्रवाई तेज हुई और पूरे गिरोह का पर्दाफाश हुआ। मामले की गंभीरता को देखते हुए आर्थिक अपराध इकाई (EOU) भी जांच में जुटी है, लेकिन अब तक इस हाईटेक नकल गिरोह के मास्टरमाइंड का पता नहीं चल पाया है। हालांकि BPSC ने स्पष्ट किया है कि जांच में अब तक प्रश्नपत्र लीक या वायरल होने का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है। जिलेवार एफआईआर में मुंगेर, नालंदा, बेगूसराय, वैशाली, गया और समस्तीपुर शामिल हैं। इस कार्रवाई के बाद आयोग ने साफ संकेत दिया है कि परीक्षा की निष्पक्षता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।













