नई दिल्ली, 24 अप्रैल (अशोक “अश्क”) टाटा समूह की विमानन कंपनी एयर इंडिया में बड़े स्तर पर छंटनी और ऑपरेशन कटौती की आशंका ने कर्मचारियों के बीच हलचल मचा दी है। इंडस्ट्री सूत्रों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 में करीब 20,000 करोड़ रुपये के अनुमानित घाटे के बाद कंपनी अपनी उड़ान सेवाओं में 15 से 20 प्रतिशत तक कटौती करने पर विचार कर रही है। इस फैसले का सीधा असर सैकड़ों फ्लाइट्स और हजारों कर्मचारियों पर पड़ सकता है।

बताया जा रहा है कि अगर ऑपरेशन्स में कटौती लागू होती है तो रोजाना संचालित होने वाली 1,100 से अधिक उड़ानों में से 100 से ज्यादा फ्लाइट्स प्रभावित हो सकती है। फिलहाल एयर इंडिया घरेलू और अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर हर दिन 700 से अधिक उड़ानें संचालित करती है। ऐसे में यह कटौती कंपनी के नेटवर्क और यात्रियों दोनों के लिए बड़ा झटका साबित हो सकती है। सूत्रों के अनुसार, कंपनी खर्चों पर नियंत्रण पाने के लिए वर्कफोर्स में भी कटौती की योजना पर विचार कर रही है। प्रस्ताव के तहत करीब 10 प्रतिशत क्रू मेंबर्स को अस्थायी रूप से ‘बेंच’ किया जा सकता है, जबकि कुल कर्मचारियों की संख्या में 5 से 7 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है।

वर्तमान में एयर इंडिया ग्रुप में लगभग 24 हजार कर्मचारी कार्यरत हैं, ऐसे में 5 प्रतिशत कटौती का मतलब करीब 1,200 नौकरियों पर खतरा मंडराना है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन प्रस्तावों की समीक्षा कंपनी की मैनेजिंग कमेटी कर चुकी है और अगले महीने बोर्ड के सामने अंतिम फैसला लिया जा सकता है। हालांकि, फिलहाल कंपनी की ओर से इस पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।इस संकट के पीछे अंतरराष्ट्रीय हालात को बड़ा कारण माना जा रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव और मिडिल ईस्ट में अस्थिरता के चलते एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है। साथ ही कई हवाई क्षेत्रों के बंद होने और रुपये की कमजोरी ने भी एयरलाइंस के खर्च को बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती लागत, महंगा ईंधन और वैश्विक अस्थिरता ने एयर इंडिया की बैलेंस शीट पर जबरदस्त दबाव बनाया है। इसका असर कंपनी की भविष्य की विस्तार योजनाओं और नए विमानों की खरीद पर भी पड़ सकता है। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो यह न सिर्फ कर्मचारियों बल्कि देश के एविएशन सेक्टर के लिए भी एक बड़ा झटका साबित हो सकता है।














