कोलकाता, 24 अप्रैल (कोलकाता डेस्क) पश्चिम बंगाल के चुनावी रण में अब सबकी नजरें दूसरे चरण की वोटिंग पर टिक गई हैं, जो 29 अप्रैल को होने वाली है। यह चरण सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी दोनों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। पहले चरण के बाद जहां बीजेपी ने 110 सीटें जीतने का दावा किया है, वहीं बहुमत का आंकड़ा छूने के लिए उसे अभी कम से कम 37 सीटों की और जरूरत होगी। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, दूसरे चरण का चुनाव किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। जिन सीटों पर इस चरण में मतदान होना है, वे लंबे समय से ममता बनर्जी के मजबूत गढ़ माने जाते रहे हैं।

ऐसे में बीजेपी के लिए यहां सेंध लगाना आसान नहीं होगा। पिछले चुनावी आंकड़ों पर नजर डालें तो इन क्षेत्रों में तृणमूल कांग्रेस का दबदबा साफ दिखता है। यही वजह है कि बीजेपी के लिए यह चरण निर्णायक साबित हो सकता है। अगर पार्टी यहां बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाती है, तो बहुमत की राह मुश्किल हो सकती है।दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस के लिए यह चरण अपनी पकड़ बनाए रखने और विपक्ष के दावों को खारिज करने का मौका है।

पार्टी पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरी है और अपने गढ़ को बचाने के लिए हर रणनीति पर काम कर रही है। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि दूसरे चरण के नतीजे ही आगे की दिशा तय करेंगे। 29 अप्रैल की वोटिंग के बाद साफ हो जाएगा कि बंगाल की सत्ता की चाबी किसके हाथ में जाने वाली है।














