पटना, 22 अप्रैल (पटना डेस्क) भारत-नेपाल सीमा पर अवैध रूप से चल रहे भारतीय नंबर के वाहनों के खिलाफ नेपाल प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। ताजा कार्रवाई सर्लाही जिले के लालबंदी क्षेत्र में हुई, जहां बीआर01एई-3340 नंबर की एक सेंट्रो कार को जब्त कर लिया गया। इस घटना के बाद सीमावर्ती इलाकों में हलचल तेज हो गई है।अधिकारियों के अनुसार, यह कार पिछले करीब तीन वर्षों से नेपाल में अवैध रूप से चलाई जा रही थी।

जांच में सामने आया कि वाहन की वैधता 2023 में ही समाप्त हो चुकी थी, बावजूद इसके इसका इस्तेमाल जारी रहा। Nepal Police और ट्रैफिक इकाइयों की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए वाहन को कब्जे में लिया और पांच दिनों के भीतर Nepal Customs Department को सौंप दिया।चौंकाने वाली बात यह रही कि जब्ती के बाद भी किसी व्यक्ति ने वाहन पर स्वामित्व का दावा पेश नहीं किया। इससे साफ संकेत मिलता है कि यह गाड़ी पूरी तरह अवैध तरीके से संचालित की जा रही थी।

इस सख्ती का असर भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों, खासकर सीतामढ़ी जिले के सोनबरसा और भिट्ठामोड़ जैसे बाजारों में साफ दिखने लगा है। वर्षों से नेपाल में खड़ी भारतीय नंबर की गाड़ियां अब चर्चा का केंद्र बन गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, कार्रवाई के डर से कई लोग अपने वाहनों को जल्द से जल्द हटाने में जुट गए हैं। कुछ इन्हें भारत में रहने वाले रिश्तेदारों के नाम ट्रांसफर कर रहे हैं, तो कई औने-पौने दाम में बेचने की कोशिश कर रहे हैं। जानकारों का कहना है कि सीमा क्षेत्र में लंबे समय से एक अनौपचारिक नेटवर्क सक्रिय था, जिसके जरिए भारतीय वाहनों को नेपाल में रखा और चलाया जाता था।

इसमें दोहरी पहचान, रिश्तेदारों के नाम पर पंजीकरण और कभी-कभी चोरी के वाहनों की तस्करी जैसे तरीके अपनाए जाते थे।नेपाल प्रशासन ने साफ कर दिया है कि आगे भी इस तरह की कार्रवाई जारी रहेगी। इसका सीधा असर सीमावर्ती लोगों, खासकर मधेशी समुदाय पर पड़ रहा है, जिनके लिए सीमा पार आवागमन अब पहले से अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है।













