नई दिल्ली, 22 अप्रैल (अशोक “अश्क”) पहले से हीं आर्थिक संकट और महंगाई की मार झेल रहे पाकिस्तान के लिए अब एक और बड़ी चिंता सामने आ गई है। वैज्ञानिकों ने अल नीनो को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है, जिससे आने वाले महीनों में मौसम का संतुलन पूरी तरह बिगड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्राकृतिक घटना का असर न केवल पाकिस्तान, बल्कि पूरे भारतीय उपमहाद्वीप पर पड़ सकता है।

European Centre for Medium-Range Weather Forecasts (ECMWF) के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए ताजा शोध में सामने आया है कि प्रशांत महासागर के नीचे असामान्य रूप से गर्म पानी तेजी से फैल रहा है। यह स्थिति अल नीनो के विकास को बढ़ावा दे रही है और साल के अंत तक ‘सुपर अल नीनो’ बनने की आशंका जताई जा रही है। वहीं National Oceanic and Atmospheric Administration (NOAA) ने भी मार्च में अनुमान लगाया था कि जून से अगस्त के बीच अल नीनो के विकसित होने की 62 प्रतिशत संभावना है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि इस दौरान महासागर और वायुमंडल के बीच संतुलन कमजोर हो जाता है, जिससे पूर्वानुमान लगाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। अल नीनो की स्थिति में भूमध्य रेखा के पास प्रशांत महासागर की सतह का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है, जिससे वैश्विक मौसम चक्र प्रभावित होता है। इसका असर अलग-अलग क्षेत्रों में अलग रूप में देखने को मिलता है। कहीं बाढ़ तो कहीं सूखे की स्थिति बन सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान में अल नीनो के कारण मानसून कमजोर पड़ सकता है, जिससे सूखे की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

वहीं कुछ क्षेत्रों में असामान्य बारिश और तूफान की संभावना भी बढ़ जाती है। ऐसे में पहले से महंगाई और आर्थिक तंगी झेल रहे देश के लिए यह स्थिति और गंभीर संकट खड़ा कर सकती है।मौसम विशेषज्ञों ने चेताया है कि आने वाले महीनों में इस संकेत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हालांकि, अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने में अभी समय है, लेकिन शुरुआती संकेतों ने वैज्ञानिकों और नीति-निर्माताओं की चिंता बढ़ा दी है।

















