बक्सर, 22 अप्रैल (विक्रांत) जिले के डुमरांव अनुमंडल क्षेत्र स्थित नंदन गांव में 105 वर्षीय वयोवृद्ध सावित्री देवी के निधन के बाद भावुक माहौल देखने को मिला। मंगलवार को आयोजित श्रद्धांजलि सभा में बड़ी संख्या में लोगों ने पहुंचकर दिवंगत आत्मा को नमन किया और उनके जीवन को एक प्रेरणादायक उदाहरण बताया।

सावित्री देवी, जो अपने पीछे समृद्ध पारिवारिक विरासत और आशीर्वादों की छाप छोड़ गईं, को गांव और आसपास के इलाके में ममतामयी और पुण्यात्मा महिला के रूप में जाना जाता था। उनकी लंबी उम्र और सादगीपूर्ण जीवनशैली को लेकर लोगों के बीच हमेशा चर्चा रहती थी। परिजन उन्हें ‘देवी स्वरूपा’ मानते थे, जिन्होंने अपने जीवनकाल में परिवार के हर सदस्य का मार्गदर्शन किया।

श्रद्धांजलि सभा में कई गणमान्य लोग शामिल हुए। भोजपुर के सरकारी अधिवक्ता और जदयू नेता रामधनी भारती, पूर्व रेलवे कर्मी विजय कुमार, पत्रकार अरुण कुमार ‘विक्रांत’, सन्नी कुमार, जय शंकर प्रसाद, पूर्व सैनिक मोहन प्रसाद और शिक्षाविद संतोष कुमार समेत कई लोगों ने तैलचित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान परिजनों की आंखें नम थीं।

पुत्र ललन प्रसाद ने भावुक होकर कहा कि उनकी मां सिर्फ मां नहीं, बल्कि पूरे परिवार के लिए शक्ति का स्रोत थीं। उनके आशीर्वाद से ही परिवार ने हर क्षेत्र में प्रगति की। उन्होंने कहा कि मां के जाने से जो खालीपन आया है, उसे कभी भरा नहीं जा सकता।सभा में मौजूद लोगों ने सावित्री देवी के जीवन को एक अनूठी मिसाल बताया।

105 वर्ष की आयु तक स्वस्थ और सक्रिय रहकर उन्होंने समाज को यह संदेश दिया कि सादगी, सेवा और संस्कार ही दीर्घायु जीवन का आधार होते हैं।

















