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बिना चीरफाड़ कमाल की सर्जरी, बिहार में पहली बार आयुष्मान योजना के तहत महंगी तकनीक से जटिल बीमारी का इलाज सफल

पटना, 21 अप्रैल (अविनाश कुमार) बिहार के चिकित्सा क्षेत्र में मंगलवार को इतिहास रच दिया गया, जब इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग ने एक बेहद जटिल प्रक्रिया को बिना चीरफाड़ सफलतापूर्वक अंजाम दिया। इस उपलब्धि ने न केवल राज्य बल्कि पूरे पूर्वी भारत में आधुनिक चिकित्सा की नई दिशा तय कर दी है। डॉक्टरों की टीम ने पहली बार आयुष्मान भारत योजना के तहत एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड गाइडेड ड्रेनेज ऑफ लार्ज वॉल्ड ऑफ नेक्रोसिस के साथ लैम्स (ल्यूमेन-अपोज़िंग मेटल स्टेंट) का सफल प्रत्यारोपण किया।

खास बात यह रही कि इतनी महंगी और जटिल प्रक्रिया अब गरीब मरीजों के लिए भी मुफ्त में उपलब्ध हो सकी है।इससे पहले इसी तकनीक का उपयोग एक माह पूर्व किया गया था, लेकिन वह सामान्य मरीज पर हुआ था, जिसमें करीब दो लाख रुपये का खर्च आया था। अकेले लैम्स स्टेंट की कीमत ही लगभग डेढ़ लाख रुपये होती है। ऐसे में आयुष्मान योजना के तहत यह उपलब्धि मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं मानी जा रही है। संस्थान के निदेशक डॉ. बिन्दे कुमार और चिकित्साधीक्षक डॉ. मनीष मंडल ने इस सफलता पर खुशी जताते हुए इसे राज्य के लिए “मील का पत्थर” बताया।

वहीं मुख्य प्रवक्ता सह उपनिदेशक डॉ. विभूति प्रसन्न सिन्हा ने कहा कि यह तकनीक जटिल पैंक्रियाटाइटिस से जूझ रहे मरीजों के लिए अत्यंत लाभकारी साबित होगी, जिससे उन्हें बिना आर्थिक बोझ के अत्याधुनिक इलाज मिल सकेगा।इस जटिल प्रक्रिया का नेतृत्व विभागाध्यक्ष डॉ. संजीव कुमार झा ने किया, जिनके साथ सहायक प्रोफेसर डॉ. भाग्यमणि, सीनियर रेजिडेंट डॉ. ऋषभ और सहयोगी स्टाफ की पूरी टीम मौजूद रही। उनकी विशेषज्ञता और टीमवर्क ने इस कठिन ऑपरेशन को संभव बनाया।

डॉ. झा के अनुसार, यह तकनीक उन मरीजों के लिए बेहद कारगर है, जिनके पेट में पैंक्रियाटाइटिस के बाद तरल पदार्थ जमा हो जाता है और ‘गोले’ जैसी स्थिति बन जाती है। एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड की मदद से पेट और सिस्ट के बीच मेटल स्टेंट लगाकर रास्ता बनाया जाता है, जिससे जमा द्रव आसानी से निकल जाता है। पहले जहां प्लास्टिक स्टेंट में गंदगी फंसने की समस्या रहती थी, वहीं मेटल स्टेंट इस समस्या को खत्म कर देता है। कुल मिलाकर, यह सफलता बिहार के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक नई क्रांति की शुरुआत मानी जा रही है।

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