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टैरिफ का तगड़ा झटका उल्टा पड़ा, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले से भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत की उम्मीद

नई दिल्ली, 21 अप्रैल (अशोक “अश्क”) वैश्विक व्यापार के मोर्चे पर बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले ने भारतीय निर्यातकों के लिए राहत की उम्मीद जगा दी है। अदालत ने पारस्परिक शुल्क के नाम पर अमेरिकी सरकार द्वारा वसूली गई रकम को वापस करने का आदेश दिया है, जिससे भारत समेत कई देशों के व्यापारियों को अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है। जानकारी के मुताबिक, यह राशि सीधे अमेरिकी खरीदारों को लौटाई जाएगी, जिन्होंने विभिन्न देशों से माल आयात करते समय अतिरिक्त शुल्क चुकाया था।

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असली फायदा उन्हीं भारतीय निर्यातकों को मिलेगा, जिनके अपने खरीदारों के साथ मजबूत व्यावसायिक संबंध हैं या पहले से कोई स्पष्ट करार मौजूद है। अमेरिका में लेदर उत्पादों का निर्यात करने वाले आर.के. जालान इस फैसले को लेकर उत्साहित नजर आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि वे इन दिनों अमेरिका में अपने खरीदारों के संपर्क में हैं और मंगलवार से रिफंड क्लेम की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। उनके अनुसार, खरीदारों ने शुल्क से जुड़ी सभी जानकारी मांगी है, ताकि रिफंड की प्रक्रिया पूरी की जा सके।

जालान ने उम्मीद जताई कि उन्हें इस फैसले से कुछ आर्थिक राहत जरूर मिलेगी। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इंशिएटिव के आकलन के अनुसार, भारत से गारमेंट, इंजीनियरिंग गुड्स, लेदर आइटम, जेम्स और ज्वैलरी खरीदने वाले अमेरिकी आयातकों को करीब 12 अरब डॉलर तक की रकम वापस मिल सकती है। अब यह पूरी तरह खरीदारों पर निर्भर करेगा कि वे इस राशि में से कितना हिस्सा भारतीय निर्यातकों के साथ साझा करते हैं। गौरतलब है कि पिछले साल अमेरिका ने भारत पर 25 प्रतिशत पारस्परिक शुल्क लगाया था। इसके अलावा रूस से तेल खरीदने के कारण 25 प्रतिशत का अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया गया, जिससे भारतीय निर्यातकों पर कुल 50 प्रतिशत तक का शुल्क भार पड़ गया था। इसके साथ ही अप्रैल से पहले के शुल्क भी निर्यातकों को चुकाने पड़े थे।

अमेरिका ने 50 से अधिक देशों पर यह पारस्परिक शुल्क लगाया था, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद निरस्त कर दिया गया है। अनुमान है कि अमेरिका को कुल मिलाकर करीब 166 अरब डॉलर की राशि वापस करनी होगी। इसी बीच, भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया भी तेज हो गई है। भारतीय वाणिज्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी इन दिनों अमेरिका में डटे हुए हैं। भारत की कोशिश है कि वह अमेरिकी बाजार में शुल्क के मामले में अपने प्रतिद्वंद्वियों से बढ़त हासिल करे, ताकि निर्यात को नई गति मिल सके। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार बना हुआ है, ऐसे में यह फैसला व्यापारिक समीकरण बदल सकता है।

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