कोलकाता, 21 अप्रैल (कोलकाता डेस्क) चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण से ठीक पहले अभूतपूर्व कदम उठाते हुए राज्य के प्रमुख समुद्री पर्यटन स्थलों को खाली कराने का आदेश जारी किया है। आयोग के निर्देश के तहत पश्चिम बंगाल के पूर्वी मेदिनीपुर जिले में स्थित दीघा, मंदारमणि, ताजपुर, उदयपुर और शंकरपुर जैसे लोकप्रिय बीच इलाकों को 48 घंटे के लिए पूरी तरह खाली कराया जा रहा है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, मंगलवार शाम 6 बजे से लेकर 23 अप्रैल को मतदान समाप्त होने तक कोई भी पर्यटक या गैर-स्थानीय व्यक्ति इन क्षेत्रों में नहीं ठहर सकेगा। होटलों और गेस्ट हाउसों को भी सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने कमरों में सिर्फ स्थानीय निवासियों को ही ठहरने दें। आदेश का उल्लंघन करने वालों पर भारतीय न्याय संहिता धारा 223 के तहत कार्रवाई की जाएगी, जिसमें 6 से 12 महीने तक की सजा का प्रावधान है।इस फैसले के बाद दीघा, मंदारमणि और आसपास के इलाकों में पुलिस ने लाउडस्पीकर के जरिए घोषणाएं शुरू कर दी है। पर्यटकों से अपील की जा रही है कि वे निर्धारित समय से पहले क्षेत्र खाली कर दें।

स्थानीय पुलिस थानों ने भी निगरानी बढ़ा दी है।चुनाव आयोग के इस आदेश को बेहद सख्त और असाधारण माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार आतिथ्य क्षेत्र को भी सीधे तौर पर चुनावी नियंत्रण के दायरे में लाया गया है। इस प्रतिबंध में राजनीतिक दलों के प्रचारकों को भी इन इलाकों में रुकने से साफ तौर पर रोका गया है। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम सुरक्षा के मद्देनजर उठाया गया है। आशंका जताई गई है कि कुछ बाहरी तत्व पर्यटक बनकर इलाके में प्रवेश कर सकते हैं और मतदान के दौरान अशांति फैला सकते हैं।

इसलिए एहतियात के तौर पर पूरे क्षेत्र को ‘नो-एंट्री जोन’ घोषित किया गया है। गौरतलब है कि ये सभी पर्यटन स्थल रामनगर विधानसभा क्षेत्र में आते हैं, जहां पिछली बार तृणमूल कांग्रेस के विधायक अखिल गिरि का दबदबा रहा है। आयोग के इस फैसले से जहां सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने की उम्मीद है, वहीं पर्यटन कारोबार को तात्कालिक झटका लगना तय माना जा रहा है।
















