आज साहित्यिक आंगन में सुप्रसिद्ध कवयित्री कविता सिंह “वफ़ा” जी की एक शानदार ग़ज़ल

अम्नो अमान चाहने वाले कहाँ गये !
मज़लूम ज़िल्ल्तों से निकाले कहाँ गये !!
हर लम्हा पी रही है ज़मीं अम्न का लहू ,
रहबर बतायें हादसे टाले कहाँ गये !
हर सम्त डस रहा है हमें तीरगी का फन ,
शम्स ओ क़मर के सारे उजाले कहाँ गये !
तक़दीर से हैं पूछते सारे ही फ़ाक़ा मस्त ,
आख़िर हमारे हक़ के निवाले कहाँ गये !
नफ़रत फ़रेब-ओ ज़ुल्म का बाज़ार गर्म है ,
इन्सानियत के मुद्दे उछाले कहाँ गये !
हैरान क्यों हो ऐ ‘वफ़ा’ आएगी पुख़्तगी ,
अल्फ़ाज़ बहर-ए-मुश्क़ में ढाले कहाँ गये !
~ कविता सिंह “वफ़ा”
















