Image

मज़लूम ज़िल्ल्तों से निकाले कहाँ गये

आज साहित्यिक आंगन में सुप्रसिद्ध कवयित्री कविता सिंह “वफ़ा” जी की एक शानदार ग़ज़ल

अम्नो अमान चाहने वाले कहाँ गये !

मज़लूम ज़िल्ल्तों से निकाले कहाँ गये !!

हर लम्हा पी रही है ज़मीं अम्न का लहू ,

रहबर बतायें हादसे टाले कहाँ गये !

हर सम्त डस रहा है हमें तीरगी का फन ,

शम्स ओ क़मर के सारे उजाले कहाँ गये !

तक़दीर से हैं पूछते सारे ही फ़ाक़ा मस्त ,

आख़िर हमारे हक़ के निवाले कहाँ गये !

नफ़रत फ़रेब-ओ ज़ुल्म का बाज़ार गर्म है ,

इन्सानियत के मुद्दे उछाले कहाँ गये !

हैरान क्यों हो ऐ ‘वफ़ा’ आएगी पुख़्तगी ,

अल्फ़ाज़ बहर-ए-मुश्क़ में ढाले कहाँ गये !

~ कविता सिंह “वफ़ा”

Releated Posts

भारत की नारियाँ

आज साहित्यिक आँगन गीत गुंजन में राष्ट्रीय राजधानी, नई दिल्ली से सुप्रसिद्ध कवयित्री अंशु विनोद गुप्ता जी की…

नशे में नशा कर रहे हो

आज साहित्यिक आँगन गीत गुंजन में बिहार, समस्तीपुर से सुप्रसिद्ध कवि प्रवीण कुमार ‘चुन्नू’ जी की एक ग़ज़ल…

रात दिन रहता है तेरी याद का दफ्तर खुला

आज साहित्यिक आँगन गीत गुंजन में पश्चिम बंग, आसनसोल से सुप्रसिद्ध शायरा ग़़ज़ाला तबस्सुम जी की एक ग़ज़ल…

पापा

आज साहित्यिक आँगन गीत गुंजन में बिहार, बेगूसराय से सुप्रसिद्ध कवयित्री डॉ सुनीता ‘सुमन’ जी की एक कविता…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top