नई दिल्ली, 14 अप्रैल (अशोक “अश्क”) देश में इस साल मानसून को लेकर चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने अपनी पहली रिपोर्ट जारी करते हुए संकेत दिया है कि 2026 में दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है। विभाग के महानिदेशक डॉ. एम. महापात्र के अनुसार, इस बार कुल बारिश औसत का करीब 92 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जिसमें 5 प्रतिशत तक उतार-चढ़ाव संभव है। मौसम विभाग ने इस संभावित कमी के पीछे अल नीनो को मुख्य कारण बताया है।

प्रशांत महासागर में विकसित हो रही यह स्थिति मानसून की गति को धीमा कर सकती है। अनुमान है कि जून के आसपास अल नीनो सक्रिय हो सकता है, जिससे बारिश पर असर पड़ेगा। इसी बीच उत्तर भारत में गर्मी का प्रकोप भी बढ़ने वाला है। दिल्ली-एनसीआर समेत कई इलाकों में तापमान 38 से 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है और लोगों को लू का सामना करना पड़ सकता है। स्वास्थ्य विभाग ने सावधानी बरतने की सलाह दी है। आंकड़ों के मुताबिक, जून से सितंबर के बीच देश में करीब 80 सेंटीमीटर बारिश होने का अनुमान है, जबकि सामान्य औसत 87 सेंटीमीटर रहता है। यानी इस बार बारिश में कमी की आशंका साफ नजर आ रही है।

हालांकि, कुछ सकारात्मक संकेत भी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ‘पॉजिटिव इंडियन ओशन डायपोल (IOD)’ बनने की संभावना है, जो अल नीनो के असर को कुछ हद तक कम कर सकता है और मानसून को सहारा दे सकता है। मौसम विभाग ने कहा है कि मई के अंत में इस पूर्वानुमान को अपडेट किया जाएगा। फिलहाल किसानों को सलाह दी गई है कि वे फसल योजना सोच-समझकर बनाएं, क्योंकि कमजोर मानसून खेती-किसानी पर सीधा असर डाल सकता है।

















