नई दिल्ली, 13 अप्रैल (अशोक “अश्क”) वैश्विक भू-राजनीति में सोमवार को बड़ा भूचाल आ गया जब डोनाल्ड ट्रम्प के नेतृत्व में अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट पर नाकेबंदी लागू करने का ऐलान कर दिया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक भारतीय समयानुसार शाम 7:30 बजे से ईरान के बंदरगाहों की ओर आने-जाने वाले जहाजों को रोका जाएगा। इस कदम का उद्देश्य ईरान की तेल बिक्री पर पूरी तरह लगाम कसना बताया गया है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने दावा किया कि इस अभियान में कई सहयोगी देश भी अमेरिका के साथ हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की सैन्य क्षमता को भारी नुकसान पहुंचाया जा चुका है और उसकी नौसेना लगभग समाप्त हो चुकी है। ट्रम्प के अनुसार अब तक 158 जहाज तबाह किए जा चुके हैं, जिससे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है। नाकेबंदी की घोषणा के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में उथल-पुथल मच गई। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) की कीमत 104 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात और बिगड़े तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।

इसी बीच एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान में हुई कूटनीतिक वार्ता विफल रहने के बाद अमेरिका ईरान पर दोबारा सैन्य कार्रवाई पर विचार कर रहा है। व्हाइट हाउस ने भी संकेत दिए हैं कि सभी विकल्प खुले हैं और हालात के अनुसार निर्णय लिया जाएगा। चीन को लेकर भी ट्रम्प ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि चीन ने ईरान को सैन्य सहायता दी, तो उस पर 50 प्रतिशत तक भारी टैरिफ लगाया जाएगा। इससे वैश्विक व्यापार युद्ध की आशंका भी बढ़ गई है। दूसरी ओर, ईरान ने पलटवार करते हुए दावा किया है कि होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह उसके नियंत्रण में है और वहां से गुजरने वाले जहाजों को रियाल में टोल देना अनिवार्य होगा। इसके अलावा ईरान में जासूसी के आरोप में करीब 50 लोगों की गिरफ्तारी भी की गई है, जिन पर अमेरिका और इजराइल को संवेदनशील जानकारी देने का आरोप है। उधर, बेन-गवीर के अल-अक्सा मस्जिद दौरे को लेकर जॉर्डन ने कड़ा विरोध जताया है और इसे भड़काऊ कदम बताया है। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है।

















