नई दिल्ली, 09 अप्रैल (अशोक “अश्क”) बॉलीवुड के शहंशाह Amitabh Bachchan का फिल्मी सफर जितना शानदार दिखता है, उतना आसान कभी नहीं रहा। एक दौर ऐसा भी था जब लगातार फ्लॉप फिल्मों ने उनके करियर पर ताला लगाने की नौबत ला दी थी। 70 के दशक की शुरुआत में सात हिंदुस्तानी से डेब्यू करने वाले अमिताभ ने आनंद, परवाना और बॉम्बे टू गोवा जैसी फिल्मों में काम किया, लेकिन सफलता उनसे कोसों दूर रही। लगातार 11 फ्लॉप फिल्मों ने उन्हें पूरी तरह तोड़ दिया था।

हालात ऐसे बन गए कि उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री छोड़ने का मन बना लिया था। इसी बीच उनकी जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आया जिसने न सिर्फ उनका करियर बचाया, बल्कि उन्हें “एंग्री यंग मैन” की पहचान भी दिलाई। यह मोड़ था फिल्म जंजीर।इस फिल्म की कहानी मशहूर जोड़ी सलीम खान और जावेद अख्तर ने लिखी थी। दिलचस्प बात यह है कि इस फिल्म के लिए पहले धर्मेंद्र, देव आनंद और दिलीप कुमार जैसे दिग्गजों को ऑफर दिया गया था, लेकिन सभी ने इसे ठुकरा दिया।अमिताभ को फिल्म तो मिल गई, लेकिन नई परेशानी खड़ी हो गई।

कोई भी बड़ी अभिनेत्री उनके साथ काम करने को तैयार नहीं थी। ऐसे में उस दौर की टॉप एक्ट्रेस जया बच्चन आगे आईं और उन्होंने फिल्म में काम करने के लिए हामी भर दी।एक पॉडकास्ट में सलीम खान ने खुलासा किया था कि जया को कहानी सुनाने पर उन्होंने साफ कहा था कि उनके लिए फिल्म में ज्यादा कुछ नहीं है। इस पर सलीम खान ने उन्हें समझाया कि भले ही रोल छोटा हो, लेकिन यह फिल्म अमिताभ के करियर को नई ऊंचाई दे सकती है।आखिरकार, जंजीर रिलीज हुई और बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया। यही फिल्म अमिताभ बच्चन के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुई और वह रातों-रात सुपरस्टार बन गए। उनकी संघर्ष भरी कहानी आज भी नए कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।
















