नई दिल्ली, 09 अप्रैल (अशोक “अश्क”) नेपाल की सत्ता संभालते ही प्रधानमंत्री बालेन शाह ने ऐसा कूटनीतिक दांव चला है, जिसने अंतरराष्ट्रीय गलियारों में हलचल मचा दी है। शाह ने भारत, चीन, अमेरिका समेत 17 देशों के राजदूतों को एक साथ बैठक के लिए आमंत्रित कर दशकों पुरानी परंपरा तोड़ दी। अब तक नेपाल में राजदूतों से अलग-अलग मुलाकातों का चलन रहा है, लेकिन इस सामूहिक संवाद ने नई विदेश नीति की स्पष्ट झलक दे दी है।

सरकार के इस कदम को संस्थागत कूटनीति की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इसी दिन विदेश मंत्रालय ने कैबिनेट मंत्रियों को 2011 से लागू राजनयिक आचार संहिता की जानकारी देकर संकेत दिया कि अब विदेश नीति व्यक्तिगत संपर्क के बजाय सिस्टम के तहत चलेगी। बैठक में ब्रिटेन, जापान, फ्रांस, जर्मनी, सऊदी अरब, कतर, इजरायल, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड, मिस्र और संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। इसके बाद 11 देशों के दूतों से अलग बैठकें कर संबंधों को और मजबूत करने की कोशिश की गई।

विश्लेषकों का मानना है कि 2006 के बाद से चली आ रही परंपराओं को तोड़ते हुए यह कदम पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में उठाया गया है। राजनीतिक सलाहकार असीम शाह ने भी माना कि अत्यधिक व्यक्तिगत संपर्क राजनयिक मानकों के खिलाफ था। 27 मार्च को शपथ लेने वाले शाह ने साफ कर दिया है कि नेपाल संतुलित विदेश नीति अपनाएगा और किसी भी वैश्विक दबाव में नहीं झुकेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल आने वाले समय में नेपाल की कूटनीति की नई दिशा तय कर सकती है।

















