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अप्रैल में लौटी फरवरी वाली ठंड: उत्तर भारत में मौसम का बड़ा उलटफेर, वैज्ञानिक भी हैरान

नई दिल्ली, 09 अप्रैल (अशोक “अश्क”) अप्रैल 2026 में उत्तर भारत का मौसम अचानक ऐसा पलटा है कि लोगों को फरवरी की ठंड का अहसास होने लगा है। राजधानी नई दिल्ली समेत पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और उत्तराखंड में दिन का तापमान सामान्य से 8 से 15 डिग्री सेल्सियस तक नीचे चला गया है। जहां आमतौर पर अप्रैल में 35 डिग्री के आसपास गर्मी रहती है, वहीं दिल्ली में पारा गिरकर करीब 21 डिग्री तक पहुंच गया है। लगातार बारिश, गरज-चमक, तेज हवाएं और ओलावृष्टि ने मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया है।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, इस असामान्य बदलाव के पीछे लगातार सक्रिय हो रहे वेस्टर्न डिस्टर्बेंस जिम्मेदार हैं। मार्च और अप्रैल की शुरुआत में दो-दो पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हुए, जिनमें 7 और 8 अप्रैल को सबसे ज्यादा असर देखने को मिला। IMD की 8 अप्रैल की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर पाकिस्तान और जम्मू-कश्मीर के ऊपर बने सिस्टम के कारण जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और पूर्वी राजस्थान में भारी बारिश, ओले और 40-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं। इतना ही नहीं, 9 से 11 अप्रैल के बीच एक और नए वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के आने की चेतावनी भी जारी की गई है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस बार वेस्टर्न डिस्टर्बेंस को अरब सागर से भरपूर नमी मिल रही है। राजस्थान के ऊपर बने साइक्लोनिक सर्कुलेशन ने इन सिस्टम को और मजबूत बना दिया है। ठंडी हवाओं और गर्म नम हवाओं की टक्कर से भारी बादल, गरज-चमक और ओलावृष्टि हो रही है, जिससे तापमान तेजी से गिर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे जलवायु परिवर्तन भी बड़ी वजह है। आर्कटिक क्षेत्र के तेजी से गर्म होने के कारण जेट स्ट्रीम में बदलाव आया है, जिससे वेस्टर्न डिस्टर्बेंस अब मार्च-अप्रैल में भी ज्यादा सक्रिय हो रहे हैं। इस असामान्य मौसम का असर खेती पर भी साफ दिख रहा है। पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में रबी फसलों को भारी नुकसान पहुंचने की खबरें हैं, जबकि पहाड़ी राज्यों में बारिश के साथ बर्फबारी जारी है। IMD के अनुसार 10 अप्रैल तक यह दौर जारी रह सकता है, जबकि 11 अप्रैल के बाद धीरे-धीरे मौसम सामान्य होने और गर्मी बढ़ने की उम्मीद जताई गई है। हालांकि विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर यही ट्रेंड जारी रहा तो आने वाले वर्षों में मौसम का मिजाज और ज्यादा अप्रत्याशित हो सकता है।

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